संवाद सहयोगी, श्रीनगर : वादी के एक मात्र जच्चा-बच्चा अस्पताल ललदेद में वीरवार सुबह उस समय हंगामा मच गया, जब वहां से शिफ्ट की गई एक गर्भवती महिला की एसएमएचएस अस्पताल में मौत हो गई। उसके परिजनों ने ललदेद अस्पताल में तैनात डॉक्टरों पर आरोप लगाया कि उनकी लापरवाही के कारण मौत हुई। अलबत्ता ललदेद प्रशासन ने लापरवाही के आरोप को नकार दिया।

श्रीनगर के ईदगाह इलाके की रहने वाली गर्भवती महिला को 3 मई को रक्तचाप ज्यादा होने की शिकायत पर ललदेद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। महिला को चार दिन अस्पताल के लेबर रूम में रखा गया। उसकी हालत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने उसका प्रसव ऑपरेशन के माध्यम से करने की ठान ली। हालांकि उसकी प्रसव की तिथि 29 मई को थी। 9 मई को ऑपरेशन कर उसका प्रसव कराया। उसने शिशु को जन्म तो दिया लेकिन इस बीच उसकी स्थिति बिगड़ गई। बुधवार देर रात उसे गंभीर स्थिति में श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल शिफ्ट कराया गया, जहां वीरवार तड़के उसकी मौत हो गई। वहां तैनात डॉक्टरों के अनुसार उसकी मौत लगातार रहने वाले हाई बल्ड प्रेशर के चलते हुई। उसकी मौत की खबर सुनते ही परिजन ललदेद अस्पताल पहुंच गए और प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप था कि महिला की मौत डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हुई। उनका कहना था कि 7 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान डॉक्टरों ने ठीक से देखभाल नहीं की। इस कारण उसका बल्ड प्रेशर सामान्य न हो सका और उसकी मौत का कारण बना। तीमारदारों ने भी ललदेद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में मरीजों की ठीक तरह से देखभाल नहीं की जाती।

इधर, अस्पताल प्रशासन ने वहां तैनात डॉक्टरों पर लगे लापरवाही के आरोप को नकारते हुए कहा कि डॉक्टरों ने महिला को बचाने की काफी कोशिश की लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी मौत हो गई। एचओडी गायनाकालोजी डॉ फरहत जबीन ने कहा कि डॉक्टरों पर लगे आरोप बिल्कुल बेबुनियाद है।

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