LOC पर हमले की आशंका, जैश-लश्कर के कैडर को ट्रेनिंग दे रही पाकिस्तानी सेना
गुलाम जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश के बीच पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर दबाव बढ़ा रही है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
पाकिस्तानी सेना जैश-लश्कर आतंकियों को एलओसी पर दे रही प्रशिक्षण।
गुलाम जम्मू-कश्मीर में जनाक्रोश के बीच बढ़ रहा सीमा पर तनाव।
उड़ी-केरन सेक्टर में बैट हमलों और घुसपैठ की आशंका बढ़ी।
नवीन नवाज, श्रीनगर। गुलाम जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश के बीच पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर दबाव बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के 50 से 60 आतंकियों को पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (एसएसजी) के साथ विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उड़ी और केरन सेक्टर के करीब आतंकी गतिविधियां के बीच नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के बार्डर एक्शन टीम (बैट) के हमलों की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने इस इनपुट की पुष्टि नहीं की है।सूचना के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना एलओसी पर उड़ी और केरन सेक्टर के करीब गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
नियंत्रण रेखा के करीब आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों से आशंका हे कि पाकिस्तानी सेना आतंकियों के साथ मिलकर सीमित हमले कर सकती है।
राजौरी-पुंछ, गुरेज-टंगडार, उड़ी और केरन सेक्टर संभावित घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील माने जा रहे हैं। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, तीन माह में जैश और लश्कर आतंकियों को पाकिस्तान सेना के विशेष दस्तों एसएसजी कमांडो के साथ प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मनशेरा क्षेत्र में एक अस्थायी प्रशिक्षण शिविर बनाए जाने का भी इनपुट है। यहां करीब 80 जेहादियों की मौजूदगी है। इनमें 50-60 आतंकी और करीब 20 एसएसजी कमांडो हैं।
पाकिस्तानी पंजाब से नए आतंकी तैयार करने की कोशिश
जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान विरोधी आंदोलन का असर आतंकी संगठनों के नेटवर्क पर भी पड़ा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यही वजह है कि आईएसआई पाकिस्तानी पंजाब और अन्य हिस्सों से नए आतंकियों की भर्ती पर जोर दे रही है।
बहावलपुर में जैश के पुराने ढांचे को सक्रिय करने और पाकिस्तान के भीतर लश्कर के प्रशिक्षण ढांचे का विस्तार करने के भी इनपुट हैं।
इसका उद्देश्य गुलाम जम्मू-कश्मीर के नेटवर्क पर निर्भरता कम करते हुए आतंकी ढांचे के लिए नए मानव संसाधन तैयार करना है।
रिपोर्ट में मीरपुर, कोटली और पुंछ समेत गुलाम जम्मू-कश्मीर के विभिन्न इलाकों में लश्कर से जुड़े लोगों द्वारा स्थानीय संपर्क बढ़ाने का दावा किया गया है।
खैबर पख्तूनख्वा में लश्कर का नया प्रशिक्षण केंद्र खोलने से स्पष्ट है कि आईएसआई पारंपरिक ठिकानों पर निर्भर रहने की बजाय पाकिस्तान के अंदर भर्ती व प्रशिक्षण नेटवर्क का विस्तार कर रही है।
जैश और लश्कर का पुनर्गठन
जैश और लश्कर के संगठन का पुनर्गठन किया जा रहा है। अब छोटे माड्यूल, सीमित संख्या में प्रशिक्षित आतंकियों की भर्ती और सीक्रेट नेटवर्क पर जोर दिया जा रहा है।
ऑनलाइन प्लेटफार्म पर फर्जी खातों के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और निष्क्रिय समर्थक नेटवर्क को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है।
लश्कर के कैडर को हमास से जुड़े तौर-तरीकों से परिचित कराने का दावा भी किया गया है।
सीमित सैन्य उकसावे की आशंका
मौजूदा संकेतों को एक साथ देखा जाए तो एलओसी पर खतरा केवल पारंपरिक घुसपैठ तक सीमित नहीं है। प्रशिक्षित कैडर, एसएसजी की भूमिका, उड़ी-केरन में संभावित मूवमेंट और बैट कार्रवाई की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
गुलाम जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान विरोधी असंतोष के बीच यदि एलओसी पर कोई सीमित सैन्य या आतंकी कार्रवाई होती है तो उसका उद्देश्य सीमा पर तनाव बढ़ाकर ध्यान बंटाना भी हो सकता है। ऐसे में आने वाले सप्ताह एलओसी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
