नवीन नवाज, श्रीनगर। attack in Kashmir. कश्मीर में आतंकी कमांडरों के लगातार मारे जाने और नए आतंकियों की घुसपैठ में नाकामी से हताश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ व जिहादी संगठनों ने अब कश्मीर में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की साजिश रची है। इसके तहत अल्पसंख्यकों के धर्मस्थलों पर सुनियोजित तरीके से हमले किए जा रहे हैं। इसके बाद वादी में सभी धर्मस्थलों की सुरक्षा को बढ़ाया गया है।

श्रीनगर के रैनवारी इलाके में 18 मई को देर रात राष्ट्रविरोधी तत्वों ने एक मंदिर पर पेट्रोल बम से हमला किया था। इस हमले में मंदिर के बाहरी गेट में आग लग गई थी। मंदिर में एक कश्मीरी पंडित परिवार भी रह रहा था। इस हमले से घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडितों में डर पैदा हो गया। दो दिन पहले लालबाजार के बोटाकदल बाग-ए-अली मर्दान में स्थित शिया समुदाय से जुड़ी मौला अली मस्जिद पर भी पेट्रोल बम से हमला हुआ। इसमें मस्जिद की खिड़की का एक हिस्सा और अंदर बिछा कालीन क्षतिग्रस्त हो गया। इन दोनों मामलों में भले ही पुलिस केस दर्ज कर लिया गया हो, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

खुफिया सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ व आतंकी संगठनों के सरगना वादी में हालात बिगाड़ने के लिए सिलसिलेवार बंद और हिंसक प्रदर्शनों का दौर फिर से शुरू करना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि कोविड-19 से पैदा हालात में अगर वादी में कानून व्यवस्थाकी स्थिति बिगड़ती है तो उन्हें अपने नापाक मंसूबे पूरे करने में मदद मिलेगी। इसलिए उन्होंने अब धर्मस्थलों को निशाना बनाने की साजिश रची है। इसलिए विशेष अलर्ट के साथ धर्मस्थलों पर पुलिस व अर्द्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। धर्मस्थलों के भीतर और आसपास के इलाकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

पहले भी निशाना बनाए गए धर्मस्थल

यह पहला मौका नहीं है, जब घाटी में जिहादी तत्वों ने धर्मस्थलों को निशाना बनाया हो। उन्होंने पहले भी ङ्क्षहदू समुदाय के धर्मस्थलों के अलावा सूफी जियारतगाहों और शिया समुदाय के धर्मस्थलों में आग लगाई है। दो अक्टूबर, 2012 को बडग़ाम में लश्कर-ए-ताइबा के छह लोगों फारुक अहमद मीर, जहूर अहमद, बरकत उर्फ अबु तलाह, एजाज अहमद उर्फ इमरान, अब्दुल्ला डार उर्फ अस्सद और रौऊफ डार उर्फ रफीक को पकड़ा गया था। इन लोगों ने जून 2012 से 15 जुलाई 2012 तक बाबा हनीफुदीन की जियारत समेत तीन धर्मस्थलों में आग लगाई थी। फारुक मीर ने पूछताछ में बताया था कि वह पाकिस्तान गया था और वहां लश्कर के कमांडरों ने उसे वादी में मंदिरों, सूफी जियारतगाहों व अन्य धर्मस्थलों केा जलाकर वादी में हालात बिगाडऩे की साजिश का जिम्मा सौंपा था।

घटनाओं की अनदेखी नहीं कर सकते

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ डॉ अजय चुरुंगु ने कहा कि हम इन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। पाकिस्तान और जिहादी तत्वों का मकसद रहा है, कश्मीर से अल्पसंख्यकों को खदेड़ निजाम ए मुस्तफा लागू करना। मंदिरों पर हमले और उनमें लूटपाट, कश्मीर में जियारतगाहों व शिया समुदाय के धर्मस्थलों पर हमले व उनमें आग लगाने की घटनाएं इसी साजिश का हिस्सा हैं।

हमने दोनों घटनाओं का संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। हमें नहीं लगता कि यह कोई सुनियोजित साजिश है। यह किसी नशेड़ी की हरकत हो सकती है। हमें मौजूदा हालात में ऐसी घटनाओं को ज्यादा हवा और प्रचार नहीं देना चाहिए, क्योंकि इनसे माहौल बिगड़ सकता है।

-डॉ. हसीब मुगल, एसएसपी श्रीनगर

Posted By: Sachin Kumar Mishra

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