श्रीनगर, [राज्य ब्यूरो] । भारत-पाक के बीच लगातार बढ़ रहे जम्मू-कश्मीर और गुलाम कश्मीर के बीच विश्वास बहाली पर भी पड़ने लगा है। पाकिस्तान ने सोमवार को कारवां-ए-अमन के यात्रियों का आदान-प्रदान न होने देने के बाद मंगलवार को कारवां-ए- तिजारत के तहत जम्मू-कश्मीर से निकले 50 व्यापारिक ट्रकों को गुलाम कश्मीर की सरहद में दाखिल नहीं होने दिया। न अपने इलाके से किसी व्यापारिक ट्रक को जम्मू-कश्मीर की तरफ आने दिया।

भारत-पाक के बीच हुए एक समझौते के तहत अप्रैल 2005 में श्रीनगर से गुलाम कश्मीर की राजधानी तक शुरू की गई बस सेवा को कारवां-ए-अमन कहते हैं। यह बस सेवा एलओसी के दोनों तरफ बसे परिवारों के लिए है। इसी बस सेवा की तर्ज पर वर्ष 2008 में जम्मू-कश्मीर व गुलाम कश्मीर के बीच ड्यूटी फ्री क्रास एलओसी बार्टर ट्रेड शुरू किया गया है। इस व्यापार को कारवां-ए- तिजारत कहते हैं।

कारवां-ए-अमन बस सेवा हर सोमवार को होती है, जबकि कारवां-ए-तिजारत मंगलवार से शनिवार तक। संबंधित अधिकारियों ने बताया कि सलामाबाद उड़ी स्थित ट्रेड फैसिलटेशन सेंटर से हमारे 50 ट्रक माल लेकर गुलाम कश्मीर के लिए रवाना हुए। अमन कमान सेतु पर कस्टम संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जब ट्रक एलओसी पार करने के लिए आगे बढ़े तो पाकिस्तानी सैनिकों ने अपने क्षेत्र में पुल का गेट ही नहीं खोला और न अपनी तरफ से आने वाले ट्रकों के बारे में कोई सूचना दी।

भारतीय ट्रक सुबह से लेकर शाम तक वहीं अमन कमान सेतु के पास खड़े रहे। संबंधित अधिकारियों ने पाकिस्तानी सेना से संपर्क कर व्यापारिक ट्रकों की अदला-बदली के बारे में पूछा, लेकिन कोई जवाबी नहीं मिला। इसके बाद हमारे ट्रक वापस आ गए। कोई भी अधिकारी बस सेवा और व्यापार को पाकिस्तानी द्वारा रोके जाने का सही कारण बताने को तैयार नहीं है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि सीमा पर पाकिस्तानी हरकत के बाद भारत की करारी जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान भड़का हुआ है।

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Posted By: Preeti jha

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