राज्य ब्यूरो, श्रीनगर: कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना बड़ा भाई बताने वाले पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन और जम्मू कश्मीर के पूर्व समाज कल्याण मंत्री सज्जाद गनी लोन अब फिर से अनुच्छेद 370 का राग अलापने लगे हैं। वह गुपकार एजेंडे (जम्मू कश्मीर में पांच अगस्त 2019 से पूर्व की स्थिति की पुनर्बहाली पर एकजुटता) का साथ देते हुए इस पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

बुधवार को श्रीनगर में एक स्थानीय न्यूज एजेंसी से बातचीत में लोन ने केंद्र सरकार पर कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पांच अगस्त 2019 को जो हुआ, वह हमारी कल्पना से परे था। केंद्र सरकार ने स्वेच्छा से जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित राज्यों में बांट दिया। अनुच्छेद 370 के सभी प्रावधान समाप्त कर दिए गए। उन्होंने कहा कि अगर कोई मुझसे पूछे कि पांच अगस्त 2019 को क्या हुआ है तो मैं यही कहूंगा कि अगर 1947 में कश्मीर में शासक से शासित को सत्ता का स्थानांतरण हुआ था तो फिर पांच अगस्त का शासित से सत्ता शासक के हाथ में चली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जम्मू कश्मीर का शासन यहां कीअवाम के नुमाइंदे नहीं, बल्कि दिल्ली के नुमाइंदे दिल्ली के लिए चला रहे हैं।

बातचीत में लोन ने माना है कि कश्मीर में विभिन्न राजनीतिक दलों में कुछ नीतिगत मतभेद हैं, लेकिन गुपकार घोषणा को लेकर हमारा एजेंडा स्पष्ट है। हमें मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस, पीपुल्स डेमाक्रेटिक पार्टी, पीपुल्स कांफ्रेंस समेत अन्य दल जो भारतीय संविधान में आस्था रखते हैं, जम्मू कश्मीर अधिनियम के खिलाफ लामबंद हैं। लोन ने कहा कि भाजपा और उसके समर्थक दल कहते हैं कि पुनर्गठन अधिनियम के खिलाफ अगर आम कश्मीरी होता तो वह सड़क पर जरूर निकलता। इस पर उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को एतराज जताने का भी मौका नहीं दिया गया। लोगों को पीएसए और जेल का डर दिखाकर चुप कराया गया है।

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