अनंतनाग-कुलगाम में हमलों के पीछे एक स्थानीय आतंकी था शामिल, IGP सुजीत कुमार का बड़ा खुलासा
अनंतनाग और कुलगाम में हुए आतंकी हमलों के पीछे एक स्थानीय आतंकी की भूमिका सामने आई है, जिसे विदेशी आतंकियों का समर्थन प्राप्त था।

अनंतनाग-कुलगाम में हमलों के पीछे एक स्थानीय आतंकी, विदेशी आतंकियों से मिल रहा था साथ: आईजीपी सुजीत कुमार।
HighLights
स्थानीय आतंकी ने विदेशी समर्थन से हमले किए।
सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
कठिन इलाकों में सफल अभियान चलाए गए।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग और कुलगाम इलाकों में हुए आतंकी हमलों के पीछे एक स्थानीय आतंकी की भूमिका सामने आई है, जिसे कुछ विदेशी आतंकियों का समर्थन मिल रहा था।
कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुजीत कुमार सिंह ने वीरवार को पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।
कश्मीर में इस समय कितने आतंकी सक्रिय हैं, इस सवाल पर आईजीपी ने निश्चित आंकड़ा देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि आतंकियों की लोकेशन लगातार बदलती रहती है। वे आज एक जगह हो सकते हैं और अगले दिन किसी दूसरे इलाके में पहुंच सकते हैं।
ऐसे में सक्रिय आतंकियों की एक तय संख्या बताना सही नहीं होगा और इससे वास्तविक स्थिति बढ़ा-चढ़ाकर पेश हो सकती है। पुलिस उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। हाल में हुई घुसपैठ की कोशिशों को लेकर पूछे सवाल पर सुजीत सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पास साझा करने के लिए कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। बिना पुष्ट जानकारी के इस संबंध में कोई दावा करना उचित नहीं होगा।
हाल ही में कुंजर (बारामूला) और बड़गाम (कश्मीर) के ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में चलाए अभियान का जिक्र करते हुए आईजीपी सिंह ने बताया कि आतंकी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों से होकर आवाजाही कर रहे थे।
विशेष रूप से प्रशिक्षित सुरक्षाबलों ने इलाके में मजबूत पकड़ बनाए रखी और अंततः अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने संकेत दिया कि बदलती आतंकी गतिविधियों के बीच सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बता दें कि 22 जुलाई को अमरनाथ यात्रा के दौरान अनंतनाग जिले के लाल चौक इलाके में आतंकी हमले में एक पुलिसकर्मी कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी बलिदान हुआ था। इसके बाद 31 जुलाई को आतंकियों ने कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की हत्या की थी।