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कश्मीर में जंगली जानवरों का खतरा बढ़ा, 17 महीने में 352 घटनाएं और 2 की मौत;वन्यजीव विभाग के पास कर्मचारियों का टोटा

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:27 PM (IST)

कश्मीर में पिछले 17 महीनों में जंगली जानवरों के साथ टकराव की 352 घटनाएं हुईं, जिनमें दो लोगों की मौत ...और पढ़ें

कश्मीर में RTI ने खोली वन्यजीव सुरक्षा की पोल। (फाइल फोटो)

कश्मीर में RTI ने खोली वन्यजीव सुरक्षा की पोल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 17 महीनों में 352 घटनाएं, दो मौतें, छह घायल।

  2. वन्यजीव विभाग में 43 पद रिक्त, कार्य प्रभावित।

  3. घायल जानवरों के इलाज की सुविधा का अभाव।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच बढ़ता टकराव लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। बीते 17 महीनों में ऐसी 352 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें दो लोगों की मौत हुई और छह घायल हुए। दूसरी ओर, इन घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की जिम्मेदारी संभालने वाला वन्यजीव विभाग कर्मचारियों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। विभाग के 89 स्वीकृत पदों में से 43 खाली हैं।

RTI के तहत वेटलैंड्स डिवीजन कश्मीर के वन्यजीव वार्डन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव की 352 घटनाएं हुईं।

214 घटनाएं, 123 पिंजरे लगाए

वित्त वर्ष 2025-26 में टकराव की 214 घटनाएं दर्ज

हुईं, जिनमें चार लोग घायल हुए। इन घटनाओं से निपटने के लिए विभागीय टीमों ने 123 पिंजरे लगाए, 168 जंगली जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास की ओर खदेड़ा और 40 जानवरों को जीवित बचाया।

वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त तक 138 घटनाएं सामने आईं। इनमें दो लोगों की मौत और दो लोग घायल हुए। इस अवधि में 44 जानवरों को पकड़ा गया या बेहोश कर नियंत्रित किया गया, जबकि 86 ट्रैप लगाए गए। पूरे 17 महीने में पांच जानवरों की मौत दर्ज हुई, जबकि एक अन्य जानवर की मौत बचाव या टकराव कम करने की कार्रवाई के दौरान हुई।

वन्यजीव रक्षकों के आधे से ज्यादा पद खाली

विभाग में कर्मचारियों की कमी समस्या को और गंभीर बना रही है। वन्यजीव रक्षकों के 40 स्वीकृत पदों में से 21 खाली हैं। फॉरेस्टर के चार पद और सहायक वन संरक्षक का पद भी रिक्त है। कुल 89 पदों में केवल 46 पर कर्मचारी तैनात हैं।

आरटीआइ में इस बात का भी खुलासा हुआ कि कामकाज चलाने के लिए विभाग को स्टेट फॉरेस्ट कारपोरेशन और टेरिटोरियल फॉरेस्ट इकाइयों जैसे दूसरे विंगों से प्रतिनियुक्ति पर छह कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ रही है। ऐसे में वन्यजीवों की मौजूदगी वाले इलाकों में निगरानी, आपात स्थिति में पहुंचने और बचाव अभियान चलाने की जिम्मेदारी सीमित कर्मचारियों पर है।

घायल वन्यजीवों के इलाज की सुविधा भी नहीं

चुनौती केवल इंसानों को जंगली जानवरों से सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। घाटी में बीमार या घायल वन्यजीवों के उपचार के लिए विभाग के पास अपनी कोई विशेष पशु चिकित्सा सुविधा नहीं है। इससे वन्यजीवों के बचाव और उपचार की व्यवस्था को मजबूत बनाने की जरूरत सामने आती है।

वन्यजीवों और इंसानों के बीच टकराव कम करने के लिए प्रभावी निगरानी, पर्याप्त कर्मचारियों, बेहतर बचाव सुविधाओं और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।