कश्मीर में ड्रग सिंडिकेट पर पुलिस का बड़ा प्रहार, 1941 गिरफ्तार और 1711 किलो नशा जब्त; 154 करोड़ की संपत्ति भी अटैच
कश्मीर पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें 1941 गिरफ्तारियां और 154 करोड़ की संपत्ति अटैच ...और पढ़ें

नशे की गिरफ्त में फंसे बच्चों को बचाने आगे आएं मां-बाप- आइजीपी। (फोटो- जागरण/साहिल मीर)
HighLights
पुलिस ने 1941 नशा तस्करों को गिरफ्तार कर 1711 किलो मादक पदार्थ जब्त किए।
नशा तस्करी से जुड़ी 154 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गईं।
आइजीपी ने माता-पिता से नशे के शिकार बच्चों के लिए मदद मांगने की अपील की।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस वर्ष अब तक 1500 से अधिक मामलों में 1941 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 1711 किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके अलावा नशा तस्करी से जुड़े आरोपितों की 154 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं।
यह जानकारी कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (आइजीपी) सुजीत कुमार सिंह ने गुरुवार को श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी।
परिजनों और माताओं से आगे आने की अपील
आइजीपी ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सामाजिक बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए परिवारों, युवाओं और समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से नशे की लत से जूझ रहे युवाओं के परिजनों और माताओं से आगे आने की अपील की।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि कोई परिवार अपने नशे के आदी सदस्य के इलाज और पुनर्वास के लिए पुलिस से संपर्क करता है तो उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। परिजन किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर सहायता मांग सकते हैं। पुलिस ऐसे लोगों को नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से उपचार एवं जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
आइजीपी ने कहा कि जो माताएं अपने बच्चों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालना चाहती हैं, वे आगे आएं। पुलिस उनकी पहचान सुरक्षित रखेगी और हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
567 बैंक खाते फ्रीज, 10.11 करोड़ रुपये नकद बरामद
नशा विरोधी अभियान की जानकारी देते हुए आइजीपी ने बताया कि पुलिस ने अब तक 567 बैंक खातों को फ्रीज किया है और लगभग 10.11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके साथ ही करीब 2111 कनाल भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई फसलों को भी नष्ट किया गया है। पुलिस का लक्ष्य नशा तस्करी के नेटवर्क को आर्थिक और जमीनी स्तर पर कमजोर करना है।
साइबर ठगी में 54 करोड़ से अधिक की रकम शामिल
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए आइजीपी ने बताया कि इस वर्ष अब तक 12,385 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें 54 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की रकम शामिल है। पुलिस ने इनमें से करीब 7.48 करोड़ रुपये बरामद करने में सफलता हासिल की है। शेष रकम का पता लगाने और उसे फ्रीज कराने के लिए बैंकों तथा संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि साइबर धोखाधड़ी के संबंध में 93 एफआइआर दर्ज की गई हैं। इनमें सात मामले म्यूल बैंक खातों से जुड़े हैं। उन्होंने युवाओं को चेताया कि वे किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, मोबाइल नंबर या पहचान का इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन के लिए न करने दें। अनजान लोगों के कहने पर बैंक खाते उपलब्ध कराना उन्हें भी साइबर अपराध में शामिल कर सकता है।
स्टंटबाजी और खतरनाक बाइकिंग पर सख्ती
आइजीपी ने युवाओं में बढ़ती तेज रफ्तार ड्राइविंग, खतरनाक बाइकिंग, ट्रिपल राइडिंग, मॉडिफाइड साइलेंसर और सड़कों पर स्टंटबाजी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन रोकने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए दिन और रात दोनों समय विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जान के साथ पैदल चलने वालों और अन्य वाहन चालकों की सुरक्षा को भी खतरे में न डालें। विशेष रूप से रात के समय तेज आवाज वाले साइलेंसर और अनावश्यक शोर से बुजुर्गों तथा बीमार लोगों को परेशानी होती है। युवाओं को दूसरों की सुविधा और सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए।
इंटरनेट मीडिया का सकारात्मक इस्तेमाल करें युवा
आइजीपी ने युवाओं से इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल सकारात्मक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार के लिए करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा ऐसे वीडियो और संदेश साझा करें जो दूसरों को खतरनाक स्टंट, यातायात नियमों के उल्लंघन और गलत गतिविधियों से दूर रहने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिस विभाग युवाओं की रचनात्मक और सकारात्मक पहलों को प्रोत्साहित करेगा तथा इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध है।
अंत में आइजीपी ने कहा कि नशाखोरी, साइबर अपराध और सड़क सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है। इसके लिए परिवारों, बुजुर्गों, युवाओं और नागरिक समाज को मिलकर काम करना होगा। समाज की सामूहिक भागीदारी से ही इन समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
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