अब राशन लेने के लिए नहीं जाना पड़ेगा 4-5 KM दूर, जम्मू-कश्मीर में नई राशन दुकानों के लिए बदले नियम; जानें
जम्मू-कश्मीर सरकार दूर-दराज के इलाकों तक राशन पहुंचाने के लिए नई दुकानें खोल रही है। इसके लिए नई नीति, तकनीकी ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में नई फेयर प्राइस शॉप्स का मास्टरप्लान तैयार। (Ai Generated)
HighLights
दूर-दराज के इलाकों में नई राशन दुकानें खुलेंगी।
ई-पॉज मशीन और आधार सत्यापन अनिवार्य होगा।
केंद्र की सामर्थ-पीडीएस योजना से दुकानदारों को लाभ।
राहुल शर्मा, श्रीनगर। अगर आप जम्मू-कश्मीर के किसी दूर-दराज के गांव में रहते हैं और राशन लेने के लिए आपको आज भी 4-5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, तो सरकार अब इस दूरी को खत्म करने के लिए राशन की नई दुकानें खोलने का पूरा हिसाब-किताब नए सिरे से बना रही है।
जनता से मिल रही लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने भी माना कि केंद्र शासित प्रदेश में फेयर प्राइस शॉप्स का जाल काफी बड़ा है, लेकिन कुछ बस्तियां अभी भी इस कवरेज से बाहर हैं। प्रदेश में नई दुकानें खोलने की जरूरत पर विभाग अब दो स्तरों पर काम कर रहा है।
पहला, नई दुकानों की स्थापना और दूसरा, पहले से चल रही दुकानों का युक्तिकरण। इसके लिए तीन पैमाने तय किए गए हैं, दुकान की आर्थिक व्यवहार्यता, उस पर टैग राशन कार्डों की संख्या और भौगोलिक पहुंच। खास तौर पर दूर-दराज और आदिवासी इलाकों को पर्याप्त कवरेज देने पर जोर है।
नई दुकान का फॉर्मूला अब बदला
कमिश्नर सेक्रेटरी फूड सिविल सप्लाई एंड कंज्यूमर अफेयर्स सौरभ भगत ने साफ किया है कि अब कोई भी नई दुकान पुराने तरीके से नहीं खुलेगी।अब एसओ 41 दिनांक 19 जनवरी 2023 को ही नया कानून माना गया है। इस आदेश के मुताबिक दुकान लेने वाले की कम से कम योग्यता बारहवीं पास होनी चाहिए, उसकी उम्र इक्कीस साल से कम और पैंसठ साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और वह उसी इलाके का स्थायी निवासी होना चाहिए जहां दुकान खोलनी है।
सरकार ने यह भी तय किया है कि दुकान आवंटन में स्वयं सहायता समूहों और महिला समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी और हर पांच साल में एक हजार रुपये लाइसेंस नवीनीकरण फीस देनी होगी। दुकान की जगह तय करने के लिए तीन बातें देखी जाएंगी कि उस इलाके में कितने राशन कार्ड हैं, दुकान चलाना आर्थिक रूप से फायदेमंद है या नहीं और सबसे ज्यादा ध्यान दूर-दराज और आदिवासी इलाकों को कवर करने पर दिया जाएगा।
इतना ही नहीं, अब बिना तकनीक के कोई दुकान नहीं चलेगी। हर नई दुकान पर ई-पॉज मशीन, इलेक्ट्रॉनिक कांटे से जुड़ी तौल मशीन और आधार से सत्यापन की व्यवस्था होना अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि तौल में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा रोका जा सके।
बदलाव के पीछे केंद्र की एक बड़ी योजना
इस पूरे बदलाव के पीछे केंद्र की एक बड़ी योजना है। दरअसल पहले दुकानदार इसलिए दुकान नहीं लेना चाहते थे क्योंकि कमाई बहुत कम थी। इस कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मई 2026 को सारथक-पीडीएस नाम की एक अम्ब्रेला योजना को मंजूरी दी। यह 25 हजार 530 करोड़ रुपये की योजना है जो 2031 तक लागू रहेगी।
इस योजना के तहत सरकार अनाज को गोदाम से दुकान तक पहुंचाने का खर्च खुद उठाएगी और साथ ही दुकानदार को हर महीने एक तय सुनिश्चित आय भी देगी, ताकि दुकान बंद न हो। जम्मू-कश्मीर में नई दुकानों का प्रस्ताव इसी सुनिश्चित आय मॉडल पर परखा जाएगा।
यह मॉडल जमीन पर काम करेगा काम
सौरभ भगत ने पंपोर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां आज एक भी बस्ती ऐसी नहीं है जो राशन दुकान से वंचित हो। वहां अंत्योदय अन्न योजना के तहत 2 हजार 679 कार्डों पर 10 हजार 163 लोग, प्राथमिकता वाले परिवारों के तहत 15 हजार 470 कार्डों पर 67 हजार 157 लोग और गैर प्राथमिकता वाले परिवारों के तहत 9 हजार 776 कार्डों पर 40 हजार 457 लोग कवर हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि अगर सही प्लानिंग और नई तकनीक के साथ काम किया जाए तो हर बस्ती तक राशन पहुंचाना मुमकिन है और सरकार अब इसी मॉडल को पूरे जम्मू-कश्मीर में दोहराने जा रही है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।