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जम्मू-कश्मीर: 13 विधायकों ने क्यों लिखा स्पीकर को पत्र? 45 मिनट की चर्चा की मांग, रेत-बजरी की कमी पर सवाल

Published: Fri, 25 Sep 2026 12:05 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में निर्माण सामग्री की कमी से विकास परियोजनाओं में देरी और लागत बढ़ रही है। इस गंभीर मुद्दे पर ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में निर्माण सामग्री की कमी पर स्पीकर से की चर्चा की मांग। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में निर्माण सामग्री की कमी पर स्पीकर से की चर्चा की मांग। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में निर्माण सामग्री की कमी से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

  2. तेरह विधायकों ने स्पीकर को पत्र लिखकर विधानसभा में चर्चा मांगी।

  3. रेत, बजरी की कमी से परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार को निर्माण सामग्री की कमी का झटका लग रहा है। रेत, बजरी, पत्थर और कंक्रीट जैसी जरूरी सामग्री की अनिश्चित उपलब्धता से सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और जलापूर्ति योजनाओं के काम प्रभावित हो रहे हैं। कई परियोजनाओं में देरी के साथ निर्माण लागत बढ़ने की स्थिति भी बन रही है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर विधानसभा के 13 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से सदन में 45 मिनट की चर्चा कराने की मांग की है।

विधायकों ने अध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में आवश्यक निर्माण सामग्री की उपलब्धता लगातार अनिश्चित बनी हुई है। इसका असर विभिन्न विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है। समय पर निर्माण सामग्री नहीं मिलने से परियोजनाओं के काम में देरी हो रही है और इससे निर्माण लागत बढ़ने की स्थिति भी पैदा हो रही है।

सरकार से मांगा जवाब

विधायकों ने कहा कि विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार से निर्माण सामग्री की कमी के कारणों की जानकारी ली जानी चाहिए। साथ ही सरकार यह भी बताए कि प्रदेश में निर्माण सामग्री की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से 45 मिनट का समय देकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की अनुमति देने का आग्रह किया है।

इन विधायकों ने किया हस्ताक्षर

पत्र पर जावेद हसन बेग, जस्टिस हसनैन मसूदी, निजामुद्दीन भट, हिलाल अकबर लोन, आरएस पठानिया, इरफान हफीज लोन, सैफ-उद-दीन भट, जावेद अहमद मीरचल, डॉ. सज्जाद शफी, डॉ. मोहम्मद शफी, वहीद-उर-रहमान पर्रा, फारूक अहमद शाह और नियाज अहमद ने हस्ताक्षर किए।

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