जम्मू-कश्मीर में सुधरी स्वास्थ्य व्यवस्था, नवजात मृत्यु दर में भारी गिरावट; अस्पतालों में 99.7% प्रसव
जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से नवजात और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। अब 99.7% प्रसव ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में नवजात मृत्यु दर घटकर 9.8 हुई। (फोटो- इंटरनेट मीडिया)
HighLights
नवजात मृत्यु दर घटकर 9.8 प्रति हजार हुई।
99.7% प्रसव अब स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे।
स्वास्थ्य बजट में वृद्धि, नई सुविधाएं भी जुड़ीं।
राहुल शर्मा, श्रीनगर। बच्चे के जन्म के बाद उसके जीवन के शुरुआती दिन सबसे ज्यादा देखभाल मांगते हैं। इस दौरान मां और नवजात को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का असर अब मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश में नवजात मृत्यु दर घटकर एकल अंक में पहुंच गई है, करीब हर प्रसव अस्पताल में हो रहा है और बच्चों के टीकाकरण का स्तर भी बेहतर हुआ है।
जम्मू-कश्मीर सरकार के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में नवजात मृत्यु दर 9.8 और शिशु मृत्यु दर 14 प्रति हजार जीवित जन्म दर्ज की गई है। यानी हर एक हजार जीवित जन्म लेने वाले बच्चों में नवजात अवस्था के दौरान करीब 10 और एक वर्ष की आयु पूरी होने से पहले 14 बच्चों की मृत्यु होती है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े इस बदलाव को और स्पष्ट करते हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 में नवजात मृत्यु दर 23.1 और शिशु मृत्यु दर 32.4 थी। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में ये घटकर क्रमशः 9.8 और 16.3 रह गईं। वहीं, सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2022 में शिशु मृत्यु दर 14 और नवजात मृत्यु दर 10 दर्ज की गई।
अस्पतालों में प्रसव का आंकड़ा भी 85.6 प्रतिशत से बढ़कर 92.4 प्रतिशत हुआ। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के अनुसार, अब 99.7 प्रतिशत प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में हो रहे हैं। बच्चों के पूर्ण टीकाकरण का स्तर भी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के 84.4 प्रतिशत से बढ़कर राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में 96.5 प्रतिशत हुआ। स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली में यह 100 प्रतिशत दर्ज है।
अस्पतालों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक बढ़ीं सुविधाएं
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 2019 के बाद प्रदेश में 1225 एमबीबीएस, 289 स्नातकोत्तर और 372 डीएनबी सीटें बढ़ाई गई हैं। नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा में भी विस्तार हुआ है। बीएससी नर्सिंग और पैरामेडिकल में 4253 तथा एमएससी नर्सिंग में 208 अतिरिक्त सीटें जोड़ी गई हैं।
इसके अलावा 3168 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शुरू किए गए हैं। प्रदेश में दो एम्स, दो राज्य कैंसर संस्थान और दो बोन एंड जॉइंट अस्पताल भी स्वास्थ्य ढांचे का हिस्सा बने हैं।
अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या 2019 के 18142 से बढ़कर 22454 हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 8813.71 करोड़ रुपये का बजट रखा गया, जो पिछले वर्ष से 480.26 करोड़ रुपये अधिक है। ई-संजीवनी के जरिए 12.05 लाख से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श भी दिए गए हैं।
स्वास्थ्य सुधार की अगली चुनौती
वहीं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने इसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि प्रदेश में जन्म के समय लिंगानुपात भी प्रति एक हजार लड़कों पर 923 लड़कियों से बढ़कर 976 हो गया है। वहीं, एसआरएस 2016-20 के अनुसार जीवन प्रत्याशा 74.3 वर्ष रही। ये आंकड़े स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की तस्वीर पेश करते है।
उन्होंने कहा कि सरकार के लिए असली चुनौती इन सुविधाओं को दूरदराज के इलाकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की है। जिस पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इन अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के साथ नवजात बच्चों के लिए विशेषज्ञ उपचार, प्रसव के बाद मां की देखभाल और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित पर काम किया जा रहा है।
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