पहलगाम हमले की बरसी पर आतंकी हमले की आशंका; J&K में हाई अलर्ट, एजेंसियों का हर षड्यंत्र विफल करने का प्लान तैयार
जम्मू-कश्मीर में पहलगाम हमले की बरसी पर आतंकी वारदात की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया गया है। सुरक्षा ...और पढ़ें

खुफिया अलर्ट के बाद पूरे प्रदेश में सुरक्षा ग्रिड मजबूत।
HighLights
पहलगाम हमले की बरसी पर आतंकी वारदात का अलर्ट।
सुरक्षा एजेंसियों ने घुसपैठ के प्रयास विफल किए।
दक्षिण कश्मीर में दो शक्तिशाली आईईडी बरामद।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में विगत एक वर्ष के दौरान किसी बड़े हमले को अंजाम देने में विफल रहे आतंकी संगठन पहलगाम हमले की बरसी के दौरान किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। बीते एक सप्ताह के दौरान पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अत्याधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों की भारतीय इलाके में सुरक्षित घुसपैठ कराने का भी प्रयास किया, जिसे सुरक्षाबलों ने विफल बनाया है।
खुफिया एजेंसियों के अलर्ट पर पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए, किसी भी आतंकी षडयंत्र को विफल बनाने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। प्रदेश के भीतरी इलाकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है।
एजेंसियों ने सुरक्षा तंत्र में किए आवश्यक बदलाव
आतंकी संगठनों द्वारा रचे जा रहे षड्यंत्र को विफल बनाने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा तंत्र की समीक्षा करते हुए उसमें आवश्यक्तानुरूप बदलाव किया है। सभी सुरक्षाबलों को पूर्व सक्रियता की नीति के तहत आतंकरोधी अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि गत सप्ताह दक्षिण कश्मीर में दो शक्तिशाली आईईडी को बरामद किया गया है, जो आतंकियों द्वारा पहलगाम हमले की बरसी के आस पास ही किसी जगह इस्तेमाल की जानी थी।
आतंकियों के किसी भी हमले को विफल बनाने के लिए सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का भी आकलन किया गया है। सभी प्रमुख धर्मस्थलों और वादी में रहने वाले अल्पसंख्यकों और प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में आतंकी हमलों की दृष्टि से संवेदनशील बस्तियों की सुरक्षा का विशेष प्रबंध करते हुए, अस्थायी सुरक्षा चौकियां भी स्थापित की जा रही हैं। विभिन्न इलाकों में सीसीटीवी की फुटेज का लगातार आकलन किया जा रहा है।
पहलगाम हमले में मारे गए थे 26 लोग
आपको बता दें कि गत 22 अप्रैल को बैसरन पहलगाम में आतंकियों ने 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक समेत 26 लोगों की हत्या की थी। इसके बाद प्रदेश में ही नही देश अन्य भागों मं आतंकी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया। भारतीय सेना ने आप्रेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को व्यापक नुक्सान पहुंचाया था।
इसके बाद आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर में तमाम कोशिशों के बावजूद कोई बड़ी वारदात करने में विफल रहे और इस दौरान सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के व्हाइट कालर टेरर माडयूल को पर्दाफाश करने के अलावा लश्कर-ए-तैयबा के कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और बंगाल में फैले एक नेटवर्क का भी भांडा फोड़ किया है।
घुसपैठ के लिए सीमा पर आतंकी तैयार
संबधित सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों पर उनके आकाओं द्वारा लगातार जम्मू-कश्मीर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जम्मू प्रांत में सांबा और कठुआ में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार पाकिस्तानी सेना की निगरानी में चलने वाले लांचिंग पैड पर आतंकियों के दो गुट जिनकी संख्या छह से सात बताई जा रही है, घुसपैठ के लिए तैयार बैठे हैं। इसी तरह से राजौरी, पुंछ के अलावा उड़ी व टंगडार सेक्टर में भी एलओसी के पार पाकिस्तानी सेना की निगरानी में चलने वाले लांचिंग पैड्स पर आतंकियों की गतिविधियों में बीते 10 दिनाें में तेजी आयी है।
उन्होंने बताया कि आतंकी हैंडलरों व उनके आकाओं द्वारा रचे जा रहे षड्यंत्र को विफल बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर में सभी सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अलर्ट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि आतंकी भीतरी इलाकों में किसी जगह सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर सकते हैं, उनके शिविरों पर दूर से आरपीजी या फिर यूबीजीएल से गोला दाग सकते हैं, किसी जगह आईईडी से धमाका कर सकते हैं या फिर आम लोगों की जान के लिए संकट पैदा करेंगे। आतंकी संगठन चाहते हैं कि वह पहलगाम हमले की बरसी के दौरान या उसके आस पास ही किसी वारदात को अंजाम दिया जा सके।
दो से तीन बार घुसपैठ का प्रयास विफल
संबधित सूत्रों ने बताया कि गत दिनों सीमा पार से अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर आतंकियों द्वारा दो से तीन बार घुसपैठ का प्रयास भी किया गया, जिसे विफल बना दिया गया। उन्होंने बताया कि जिला कठुआ और सांबा के सीमावर्ती इलाकों में भी घुसपैठ की आशंका के चलते तलाशी अभियान चलाए गए हैं। पुलिस, सेना, सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षा एजेंसियों किसी भी आपात परिस्थिति से निपटने की अपनी तैयारी को लगातार परखने के लिए माक ड्रिल का भी आयोजन कर रहे हैं।
