जम्मू-कश्मीर में बिजनेस करना हुआ आसान, खुद घोषणा कर शुरू कर सकेंगे कारोबार; जानें नए नियम
जम्मू-कश्मीर सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं, जिससे उद्यमी स्व-घोषणा के आधार पर ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत महत्वपूर्ण सुधार लागू किए। (Ai Generated)
HighLights
स्व-घोषणा पर कारोबार शुरू करने की मिलेगी सैद्धांतिक मंजूरी।
निवेश अनुमोदनों के लिए कार्यकारी समिति बनी एकल नोडल एजेंसी।
उद्यमियों को तीन साल तक नियमित निरीक्षण से मिलेगी राहत।
नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में निवेश को प्रोत्साहित करने और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबार करने में सुगमता) के तहत महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। अब पात्र उद्यमियों को कारोबार शुरू करने के लिए विभिन्न विभागों से पहले ही मंजूरियां लेने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। वे स्व-घोषणा- सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर सैद्धांतिक मंजूरी का प्रमाणपत्र प्राप्त कर उद्योग स्थापित करने और कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेंगे।
इसके साथ ही निवेश से जुड़े सभी अनुमोदनों के लिए सरकार ने कार्यकारी समिति को एकल नोडल एजेंसी बनाया है। नई व्यवस्था में उद्यमियों को प्रमाणपत्र जारी होने के बाद तीन साल तक नियमित निरीक्षण से भी राहत मिलेगी।
जम्मू-कश्मीर सरकार ने गत बुधवार चार नवंबर को महाप्रशासनिक विभाग के माध्यम से जारी अधिसूचनाओं में जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026 के महत्वपूर्ण प्रावधानों को लागू करने की व्यवस्था स्पष्ट की है।
इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत देना, सरकारी मंजूरियों में होने वाली देरी को खत्म करना और प्रदेश में निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है।
एक ही एजेंसी से मिलेंगी निवेश से जुड़ी मंजूरियां
नई व्यवस्था के तहत कार्यकारी समिति निवेशकों के लिए एकल संपर्क एजेंसी के रूप में काम करेगी। उद्योग स्थापित करने से पहले की मंजूरियों, भवन निर्माण, बिजली-पानी के कनेक्शन, अग्निशमन सुरक्षा, पर्यावरण, फैक्टरी लाइसेंस और कारोबार के संचालन से जुड़े अनुमोदनों के लिए विभिन्न विभागों के बीच यही समिति समन्वय करेगी। यह व्यवस्था पूरे जम्मू-कश्मीर में लागू होगी और अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्रों, औद्योगिक पार्कों तथा औद्योगिक क्लस्टरों में स्थापित होने वाले उद्यम भी इसके दायरे में आएंगे।
अब तक उद्यमियों को एक उद्योग स्थापित करने के लिए कई विभागों और एजेंसियों से अलग-अलग मंजूरियां लेनी पड़ती थीं। प्रत्येक विभाग की अपनी प्रक्रिया, दस्तावेज और समयसीमा होने के कारण परियोजनाओं में देरी होती थी। नई व्यवस्था में कार्यकारी समिति इन सभी प्रक्रियाओं को एक तंत्र के तहत लाकर निवेशकों को समयबद्ध मंजूरियां दिलाने का काम करेगी। जिला अधिकारप्राप्त समितियां इस प्रक्रिया में कार्यकारी समिति के साथ समन्वय करेंगी।
तीन कार्यदिवस से 30 दिन में मिलेगी सैद्धांतिक मंजूरी
सरकार ने कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। पात्र उद्यमी जिला अधिकारप्राप्त समिति के समक्ष डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट यानी कारोबार स्थापित करने की मंशा संबंधी स्व-घोषणा प्रस्तुत कर सैद्धांतिक मंजूरी का प्रमाणपत्र (सीआईपीए) प्राप्त कर सकेंगे।
स्वीकृत औद्योगिक पार्कों में स्थापित होने वाली इकाइयों को तीन कार्यदिवस के भीतर यह प्रमाणपत्र जारी करना होगा, जबकि औद्योगिक पार्कों के बाहर स्थापित होने वाले नए उद्यमों के लिए 30 कार्यदिवस की समयसीमा निर्धारित की गई है। यदि संबंधित समिति निर्धारित समय में निर्णय नहीं लेती है तो मंजूरी स्वत: स्वीकृत मानी जाएगी और उद्यमी पोर्टल से इसका प्रमाणपत्र डाउनलोड कर सकेंगे।
यह प्रमाणपत्र तीन साल तक वैध रहेगा। इस अवधि में उद्यमी उद्योग की स्थापना, निर्माण और संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हुए संबंधित विभागों से नियमित अनुमोदन प्राप्त कर सकेंगे।
तीन साल तक नियमित निरीक्षण से राहत
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट के तहत पात्र उद्यमों को प्रमाणपत्र जारी होने के बाद तीन साल तक नियमित सरकारी निरीक्षण और संबंधित मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि गंभीर शिकायतों और कानून में निर्धारित विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारियों की अनुमति से निरीक्षण किया जा सकेगा। सरकार ने स्व-प्रमाणन और तीसरे पक्ष से प्रमाणन की व्यवस्था भी की है, ताकि हर छोटे-बड़े मामले में विभागीय निरीक्षण की जरूरत न पड़े।
दोहरे लाइसेंस की जरूरत भी होगी कम
सरकार ने कारोबारियों पर अनावश्यक लाइसेंस और पंजीकरण का बोझ कम करने के लिए भी कदम उठाया है। अधिनियम की धारा 24 के तहत निर्धारित गतिविधियों के लिए मान्य लाइसेंस या पंजीकरण को पर्याप्त माना जाएगा और उसी गतिविधि के लिए अलग से दूसरा स्थानीय लाइसेंस या पंजीकरण मांगने की व्यवस्था समाप्त की गई है।
उदाहरण के तौर पर, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का वैध लाइसेंस रखने वाले खाद्य कारोबारियों को उसी गतिविधि के लिए अलग नगरपालिका ट्रेड या स्वास्थ्य लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। इसी तरह जीएसटी पंजीकरण और निर्धारित एमएसएमई तथा श्रम कानूनों के तहत मान्य पंजीकरणों को भी संबंधित गतिविधियों के लिए पर्याप्त माना जाएगा।
निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार के इन फैसलों से जम्मू-कश्मीर में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक निवेशकों को समय और धन दोनों की बचत होगी। मंजूरियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और निर्धारित समय में अनुमति मिलने से परियोजनाओं को शुरू करने में देरी कम होगी। तीन साल तक नियमित निरीक्षण से राहत मिलने पर उद्यमी उत्पादन और कारोबार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
दोहरे लाइसेंस समाप्त होने से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को लाभ होगा। इससे नए कारोबारियों के लिए बाजार में प्रवेश आसान होगा और औद्योगिक गतिविधियों में अधिक लोगों की भागीदारी बढ़ सकती है।
निवेश प्रक्रिया सरल होने से निजी कंपनियों को जम्मू-कश्मीर में पूंजी लगाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अनुमति आधारित व्यवस्था की जगह नियम आधारित प्रशासन पर जोर
जम्मू-कश्मीर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026 का व्यापक उद्देश्य पुराने अनुमति आधारित प्रशासनिक ढांचे की जगह नियम आधारित व्यवस्था विकसित करना है। इसके तहत किसी उद्यम को तब तक कारोबार करने की स्वतंत्रता होगी, जब तक संबंधित गतिविधि कानून के तहत प्रतिबंधित नहीं है।
सरकार ने एकल राज्य सिद्धांत को भी महत्व दिया है, जिसके अनुसार विभिन्न विभागों को एक ही जानकारी और दस्तावेज बार-बार मांगने से बचना होगा।
29 अक्टूबर को विधानसभा में पारित हुआ था विधेयक
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने 29 अक्टूबर को इस विधेयक को पारित किया था। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में चर्चा के दौरान कहा था कि सरकार का काम स्वयं व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाना नहीं, बल्कि निजी उद्योगों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना है।
सरकार का मानना है कि सरल प्रक्रियाओं, समयबद्ध मंजूरियों और प्रशासनिक बाधाओं में कमी से जम्मू-कश्मीर में निवेश आकर्षित करने और आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।
इस अधिनियम को जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक और कारोबारी माहौल में बदलाव की दिशा में एक व्यापक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कार्यकारी समिति, जिला अधिकारप्राप्त समितियां और संबंधित विभाग इन प्रावधानों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं।
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