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बैसरन हमले के एक साल बाद, जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने वाले अब खुद आतंकित, हर ठिकाना बना कब्रिस्तान

By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
Published: Wed, 22 Apr 2026 01:38 PM (IST)Updated: Wed, 22 Apr 2026 03:31 PM (IST)

बैसरन हमले के एक साल बाद, जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है, जिससे वे ...और पढ़ें

पहलगाम के बाद सुरक्षाबलों की बहुस्तरीय घेराबंदी से आतंकी सरगना भूमिगत होने को विवश।

पहलगाम के बाद सुरक्षाबलों की बहुस्तरीय घेराबंदी से आतंकी सरगना भूमिगत होने को विवश।

HighLights

  1. बैसरन हमले के बाद 46 आतंकी मारे गए, कई गुट समाप्त।

  2. ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से आतंकियों के ठिकाने ध्वस्त किए गए।

  3. आतंकी भर्ती और घुसपैठ में भारी कमी दर्ज की गई।

नवीन नवाज, श्रीनगर। एक वर्ष पहले हुए बैसरन (पहलगाम) हमले के बाद जो हुआ, उसके बारे में आतंकियों और उनके आकाओं ने कभी नहीं सोचा था। जम्मू-कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकी और उनके सरगना अब खुद आतंकित हैं और अपनी जान बचाने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं।

पूर्व सक्रियता के साथ खोजो और मारो अभियान से आगे बढ़ते हुए सुरक्षाबल अब उनके रास्ते भी बंद करते जा रहे हैं। आतंकियों को अपने ठिकाने से बाहर निकलने का मौका नहीं मिल रहा है और अगर मिलता है तो उनका सामना मौत से होता है।

उच्चर्वतीय और वनीय क्षेत्रों में सुरक्षाबल पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक तरीके से अभियान चला रहे हैं, जिसमें ड्रोन और इलेक्ट्रानिक सर्वेलांस का भी सहारा लिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी जंगल और माउंटेन वारफेर में विशेषज्ञ अपनी दो इकाइयां स्नो लैपर्ड (हिम तेंदुए) और मरखोर को ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया है।

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सुरक्षा एजेंसियों और सुरक्षाबल के बीच समन्वय बेहतर बनाया

आतंकियों की नकेल कसने के लिए एकीकृत मुख्यालय को और ज्यादा समर्थ बनाया गया है। सभी सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न सुरक्षाबल के बीच समन्वय को और बेहतर बनाया गया है। एक संयुक्त नियंत्रण कक्ष बनाया गया है, जिसके तहत हर सप्ताह संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों की बैठक में समूचे सुरक्षा परिदृश्य का जायजा लिया जाता है, आतंकरोधी अभियानों की प्रगति का आकलन किया जाता है और आगे की रणनीति तय की जाती है।

22 अप्रैल 2025 के बाद से सुरक्षाबल ने प्रदेश में अलग-अलग मुठभेड़ों में अब तक 46 आतंकियों को मार गिरया है। इनमें पहलगाम के तीन गुनाहगार भी शामिल हैं। किश्तवाड़, डोडा, ऊधमपुर और कठुआ में सुरक्षाबल के लिए सिरदर्द बने नए आतंकी गुटों का भी लगभग सफाया किया जा चुका है। इनमें बीते तीन वर्ष से सुरक्षाबल को चकमा दे रहा जैश का कमांडर सैफुल्ला भी शामिल है।

वह 22 फरवरी को अपने दो अन्य साथियों संग किश्तवाड़ के छात्रू में मारा गया था। उसे पूर्व चार फरवरी को सुरक्षाबल ने एक और आतंकी को मार गिराया था। ऊधमपुर के बसतंगढ़ में चार फरवरी को सुरक्षाबल ने दो आतंकियों को मार गिराया और उससे पहले 23 जनवरी को कठुआ जिले के बिलावर इलाके में जैश कमांडर कमांडर उस्मान उर्फ अबू माविया को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था।

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भारत के दुश्मन पाकिस्तान में मारे जा रहे

जम्मू-कश्मीर मामलों के जानकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद से सुरक्षा परिदृश्य में व्यापक बदलाव आया है। यही कारण है कि सफेदपोश आतंकी माड्यूल को ध्वस्त करने के साथ गत माह पंजाब से दो पाकिस्तानी आतंकियों को दबोचा गया। सीमा पर घुसपैठ की कोई बड़ी कोशिश नहीं हुई है।

आतंकी भर्ती में उल्लेखनीय कमी है। पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को हुए नुकसान का असर जम्मू-कश्मीर में महसूस किया जा सकता है। कश्मीर मामलों के एक अन्य जानकार रमीज मखदूमी ने कहा कि भारत के दुश्मन पाकिस्तान में मारे जा रहे हैं। यही कारण है कि उनके प्रमुख कमांडर अब पाकिस्तान में सार्वजनिक रैलियों में नजर नहीं आ रहे हैं।

इलेक्ट्रानिक सर्वेलांस, सीसीटीवी और ड्रोन का इस्तेमाल

आतंकरोधी अभियानों में शामिल जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब जंगल और पहाड़ सभी रास्तों को बंद किया गया है, जिनका इस्तेमाल आतंकी एक क्षेत्र से दूसरे में जाने के लिए करते थे। आतंकी गतिविधियों की सूचना वाले इलाकों में सुरक्षाबल की तैनाती बढ़ाई गई है। इलेक्ट्रानिक सर्वेलांस, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन का इस्तेमाल हा रहा है। अब आतंकियों के लिए अपने ठिकानों से निकलना मुश्किल है।

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