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नौकरी मांगने वाले नहीं... अब रोजगार देने वाले बने जम्मू-कश्मीर के युवा, सालभर में 10,814 कारोबार शुरू; 85000 को काम

Published: Wed, 04 Nov 2026 03:36 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर 6.7% से घटकर 6.1% हुई है, क्योंकि युवा सरकारी नौकरी के बजाय स्वरोजगार की ओर बढ़ ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर घटी, स्वरोजगार का दायरा बढ़ा। (Ai Generated)

जम्मू-कश्मीर में बेरोजगारी दर घटी, स्वरोजगार का दायरा बढ़ा। (Ai Generated)

HighLights

  1. बेरोजगारी दर 6.7% से घटकर 6.1% हुई।

  2. युवा सरकारी नौकरी छोड़ स्वरोजगार अपना रहे हैं।

  3. मिशन युवा से 594 करोड़ रुपये का ऋण वितरित।

राहुल शर्मा, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में युवाओं के लिए रोजगार का पारंपरिक मॉडल धीरे-धीरे बदल रहा है। सरकारी नौकरी की तलाश के साथ अब युवा अपना कारोबार शुरू करने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। स्वरोजगार योजनाओं, बैंक ऋण और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने वाली पहलों के जरिए छोटे उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में बेरोजगारी दर 2019-20 के 6.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 6.1 प्रतिशत रह गई। इसी अवधि में श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 64.3 प्रतिशत और कामगार-जनसंख्या अनुपात 60.4 प्रतिशत हो गया। ये आंकड़े रोजगार बाजार में बढ़ती भागीदारी का संकेत देते हैं।

एक साल में स्थापित हुईं 10,814 इकाइयां

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और जम्मू-कश्मीर ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम (जेकेआरईजीपी) के तहत वित्त वर्ष 2024-25 में 10,814 इकाइयां स्थापित की गईं। इनसे करीब 85 हजार युवाओं को स्वरोजगार मिला। इससे छोटे कारोबार को स्थानीय स्तर पर रोजगार का माध्यम बनाने की सरकारी कोशिश को गति मिली है।

वित्त वर्ष 2025-26 में भी यह सिलसिला जारी रहा। सितंबर 2025 तक पीएमईजीपी, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जेकेआरईजीपी और अन्य रोजगार योजनाओं के तहत 12,977 मामलों को मंजूरी दी गई। इस दौरान 10,139 लाभार्थियों को कुल 389.56 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।

मिशन युवा से उद्यमिता को बढ़ावा

युवाओं को नौकरी तलाशने के बजाय उद्यमी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया मिशन युवा भी अहम भूमिका निभा रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, इसके तहत 13,324 मामलों को बैंकों से मंजूरी मिली और 10,329 उद्यमियों को कुल 594 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

इसका उद्देश्य युवाओं को कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

वहीं, नवंबर 2025 तक प्रदेश में 36.08 लाख असंगठित कामगार ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत थे। यह असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की बड़ी संख्या को दर्शाता है। हालांकि, इस पंजीकरण को नए रोजगार सृजन का आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

कारोबार को टिकाऊ बनाना सबसे बड़ी चुनौती

जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और छोटे विनिर्माण उद्योगों में स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि, केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। नए उद्यमों को सफल बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच, तकनीकी मार्गदर्शन और कारोबार प्रबंधन में भी सहयोग जरूरी है।

रोजगार योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि शुरू की गई इकाइयां कितने समय तक सक्रिय रहती हैं, उनसे उद्यमियों की आमदनी में कितना सुधार होता है और वे आगे कितने लोगों को रोजगार दे पाती हैं।

जम्मू-कश्मीर में स्वरोजगार का बढ़ता दायरा युवाओं के लिए नए अवसर खोल रहा है, लेकिन अब चुनौती इन कारोबारों को टिकाऊ बनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की है।

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