किश्तवाड़, बलवीर सिंह जम्वाल। किश्तवाड़ इलाके में गिने-चुने ही आतंकी सक्रिय हैं। तीन ही आतंकी हैं, जिन्होंने एक वर्ष के अंदर चार बड़ी वारदातों को अंजाम देकर सुरक्षाबलों की नींद हराम कर दी है। चौथा आतंकी अप्रैल में इस गुट में मिला है और तीनों के साथ सक्रिय हुआ। सुरक्षाबल और पुलिस इन मुट्ठी भर आतंकियों को दबोचने में विफल साबित हो रहे हैं।

किश्तवाड़ में राष्ट्रीय राइफल की तीन बटालियन हैं। दो बटालियन सीआइएसएफ, एक बटालियन सीआरपीएफ और पिछले आठ महीने से एक बटालियन आइटीबीपी की भी तैनात है। इसके अलावा स्पेशल ड्यूटी पर आए सीआरपीएफ व अन्य सुरक्षाबलों और पुलिस को मिलाकर हजारों सुरक्षाबल किश्तवाड़ में तैनात हैं। इसके अलावा कई गुप्तचर एजेंसियां भी काम कर रही हैं। इसके बावजूद चार आतंकी किसी के हत्थे नहीं चढ़ रहे। आतंकी हर बार नया प्लान बनाकर वारदात को अंजाम देते हैं और फिर भूमिगत हो जाते हैं।

एक वर्ष के अंतराल में ही किश्तवाड़ में चार बड़ी वारदातें होने से लोग दहशत में हैं। बीते शुक्रवार को हुई वारदात ने तो सबकी आंखें खोल कर रख दीं। आतंकी पूरी रात पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के जिला अध्यक्ष शेख नासिर के घर में छिपे रहे। दूसरे दिन दिनदहाड़े 11 बजे वहां से कार लेकर फरार हुए और वहां से 10 किलोमीटर दूर कार को खड़ा करके भूमिगत हो गए। ऐसे में सारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आतंकी पुलिस और सुरक्षाबलों की पकड़ में क्यों नहीं आ रहे हैं? कहीं न कहीं यह सुरक्षाबलों और गुप्तचर एजेंसियों की नाकामी की ओर इशारा करते हैं।

आतंकियों के बच निकलने के पीछे ओजीडब्ल्यू

किश्तवाड़ में आतंकी हमलों के बाद आतंकियों के बच निकलने के पीछे के स्थानीय ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) का हाथ माना जा रहा है। सुरक्षाबल और खुफिया एजेंसियां अब इसी थ्योरी पर काम कर रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि आतंकी वारदात से पहले ओजीडब्ल्यू से रेकी करवाते हैं। उसके बाद वारदात को अंजाम देने व फरार होने में इन्हीं ओजीडब्ल्यू का सहारा लेते हैं। सुरक्षाबल अब आतंकियों के साथ ओजीडब्ल्यू की सरगर्मी से तलाश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में किश्तवाड़ शहर से कुछ गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

किश्तवाड़ में यह चार आतंकी हैं सक्रिय

किश्तवाड़ इलाके में प्रमुख रूप से चार आतंकी सक्रिय हैं। इनमें ओसामा बिन जावेद, हारून बानी, नावेद मुश्ताक शाह और जाहिद हुसैन उर्फ मिशन करुसा हैं। चारों ज्यादातर किश्तवाड़ के बौंजुवार, परिवाग और चिराग इलाके में सक्रिय रहते हैं। इनका स्थायी तौर पर कोई ठिकाना नहीं है। यह चारों लगातार स्थान बदलते रहते हैं, जिस कारण उन्हें दबोचना सुरक्षाबलों के लिए मुश्किल हो गया है।

ओसामा बिन जावेद : हर गली मोहल्ले का जानकारकिश्तवाड़ में सक्रिय आतंकी ओसामा बिन जावेद किश्तवाड़ की मड़वा तहसील क्षेत्र का रहने वाला है। दो साल पहले ही आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हुआ है। पिछले कई वर्षो किश्तवाड़ में ही रहा है। स्थानीय लोगों के साथ उठना-बैठना भी है। इसके अलावा वह किश्तवाड़ के हर गली-मोहल्ले का जानकार है।

हारून बानी :

एमबीए करने के बाद बना आतंकीहारून बानी जम्मू संभाग के डोडा जिले के घाठ गांव का रहने वाला है। एक साल पहले ही एमबीए करने के बाद आतंकी बन गया था। वह ओसामा बिन जावेद के साथ मिलकर काम कर रहा है। किश्तवाड़ में हाल ही में हुई आतंकी घटनाओं में उसने सक्रिय भूमिका निभाई है।

नावेद मुश्ताक शाह :

पुलिस से भाग कर बना आतंकी नावेद मुश्ताक शाह दक्षिण कश्मीर के शोपियां का रहने वाला है। पहले भी आंतकी था। आत्मसमर्पण करने के बाद पुलिस में भर्ती हो गया। फिर पुलिस से भगोड़ा होकर आतंकी बन गया और किश्तवाड़ में सक्रिय हो गया। जावेद और बानी का साथी है और शातिर दिमाग वाला है।

जाहिद हुसैन उर्फ मिशन करुसा :

अप्रैल में हुआ सक्रियजाहिद हुसैन उर्फ मिशन करुसा दक्षिण किश्तवाड़ का रहने वाला है। अप्रैल महीने में ही जावेद, बानी और नावेद के गुट में शामिल हुआ था। इसके बाद वह इन आतंकियों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

Posted By: Preeti jha

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