सिर्फ चिट्ठी-पार्सल नहीं, 'डाक' से विदेशों तक पहुंच रहा कश्मीरी केसर-अखरोट; छोटे कारोबारियों को बड़ी सुविधा
डाकघर अब केवल चिट्ठी-पार्सल तक सीमित नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में नागरिक सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के केंद्र बन रहे हैं। ...और पढ़ें

डल झील में स्थित 'फ्लोटिंग पोस्ट ऑफिस'। (फाइल फोटो)
HighLights
डाकघर अब नागरिक सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए केंद्र।
'डाक घर निर्यात केंद्र' स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाएगा।
आधार, पासपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण नागरिक सेवाएं अब डाकघरों में उपलब्ध।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कभी चिट्ठियों और पार्सल के इंतजार का ठिकाना रहे डाकघर अब बदलते भारत में नागरिक सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए केंद्र बन रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के अखरोट, केसर, कालीन, पश्मीना और पारंपरिक हस्तशिल्प अब डाक नेटवर्क के जरिए दुनिया के बाजारों तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर सर्किल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल सागर हनुमान सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए डाक विभाग की बदलती भूमिका और नई सेवाओं पर प्रकाश डाला।
सिंह ने बताया कि 'डाक घर निर्यात केंद्र' स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इसके माध्यम से निर्यातकों, कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे कारोबारियों को निर्यात संबंधी दस्तावेज तैयार करने, पोस्टल बिल ऑफ एक्सपोर्ट, सीमा शुल्क निकासी, पैकेजिंग, बुकिंग और पार्सल की ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाने का रास्ता आसान हो सकता है।
आधार अपडेट से लेकर पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस तक सेवाएं
सिंह ने बताया कि डाक विभाग अब केवल डाक पहुंचाने वाला माध्यम नहीं, बल्कि नागरिक सुविधाओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। डाकघरों में आधार नामांकन और अपडेट, पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस तथा आधुनिक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विदेश मंत्रालय के समन्वय से संचालित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के लोगों को पासपोर्ट संबंधी सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं।
यही नहीं डिजिटल तकनीक, आधुनिक डाक सॉफ्टवेयर, कंप्यूटरीकृत कामकाज, ट्रैक-एंड-ट्रेस सुविधा और प्रमुख डाकघरों में सेल्फ-बुकिंग कियोस्क से कामकाज की दक्षता और ग्राहकों की सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
दुर्गम इलाकों तक पहुंच, पत्र लेखन को भी बढ़ावा
डोडा, किश्तवाड़, रियासी, राजौरी, गुरेज, मछिल, टंगधार के पास स्थित टिटवाल, केरन और जंस्कर जैसे दूरदराज व सीमावर्ती क्षेत्रों तक फैला डाक नेटवर्क लोगों को जोड़ने और जरूरी सेवाएं पहुंचाने में अहम है।
विश्व डाक दिवस के अवसर पर 9 से 15 अक्टूबर तक मनाए जा रहे राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान विभाग अपनी सेवाओं और योगदान को रेखांकित कर रहा है।
'ढाई आखर' प्रतियोगिता में 31 अक्टूबर तक भेजें प्रविष्टियां
डाक विभाग हस्तलिखित पत्रों की परंपरा को जीवित रखने के लिए वार्षिक ‘ढाई आखर’ पत्र लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित करता है। इस वर्ष इसमें प्रविष्टियां भेजने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 है।
सिंह ने कहा कि इंडिया पोस्ट अपनी व्यापक पहुंच के जरिए हर नागरिक को जोड़ने और जरूरी सेवाएं दक्षता, विश्वसनीयता व संवेदनशीलता के साथ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
