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बेंगलुरु का मेडिकल छात्र कैसे बना कश्मीर का खूंखार आतंकी? ISI की कड़ी सुरक्षा के बाद भी मारा गया हमजा बुरहान

Published: Thu, 21 May 2026 09:59 PM (GMT+05:30)

अल-बदर मुजाहिदीन का ऑपरेशनल कमांडर अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान गुलाम जम्मू कश्मीर के मुजफ्फराबाद में एक हमले में गंभीर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अल-बदर कमांडर अर्जमंद गुलजार मुजफ्फराबाद में गंभीर घायल।

  2. बेंगलुरु का पूर्व मेडिकल छात्र, ISI का खास आतंकी।

  3. कश्मीर में आतंकी नेटवर्क और भर्ती का संचालन करता था।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। घाटी में विभिन्न आतंकी हमलों में पुलिस को वांछित अल-बदर मुजाहिदीन का ऑपरेशनल कमांडर अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान गुरुवार को गुलाम जम्मू कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में एक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया। हालांकि, समचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, हमले में उसकी मौत होने का दावा किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह पाकिस्तानी सेना के अस्पताल में डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में है। अर्जमंद गुलजार मूलत: दक्षिण कश्मीर में खरबतपोरा पुलवामा का रहने वाला है।

लगभग 27 वर्षीय अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान बीते आठ से पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी ISIका डार्लिंग बना हुआ था। वह अल-बदर मुजाहिदीन की कमान कौंसिल में उसका तीसरा स्थान है।

पहले बख्त जमीन, उसके बाद यूसुफ बलोच और फिर अर्जमंद गुलजार। घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के नेटवर्क के लगभग तबाह होने के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई आतंकवाद के स्थानीय चेहरे के तौर पर उसे इस्तेमाल करते हुए उसके जरिए कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की भर्ती का षड्यंत्र चला रही थी।

एमएस कॉलेज परिसर के पास हुआ अटैक

मिली जानकारी के अनुसार, अर्जमंद गुलजार पर हमला मुजफ्फराबाद के साथ सटे ओजरा में एमएस कॉलेज परिसर के पास हुआ है। अर्जमंद बीते चार वर्ष से इस कॉलेज का संचालक और प्रिसिंपल था। बताया जाता है कि यह कॉलेज ISI ने ही उसे खोलकर दिया है ताकि वह कॉलेज की आड़ में अपनी जिहादी गतिविधियां चला सके।

उसे ISI ने निजि अंगरक्षकों का एक दस्ता और तीन एक्सयूवी गाड़ियां भी प्रदान कर रखी थी। बताया जा रहा है कि उस पर हमला करने वाले दो युवकों में से एक को मौके पर ही पकड़ लिया गया। उसके पास से पिस्तौल भी मिली है। अर्जमंद को चार गोलियां लगी हैं।

10 लाख का था इनाम

केंद्रीय गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 20 अप्रैल 2022 को आतंकी घोषित किए गए अर्जमंद पर सुरक्षाबलों ने 10 लाख का इनाम भी रखा हुआ था। बताया जाता है कि आतंकी बनने से पहले वह बेंगलुरू के किसी कॉलेज में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा था और वहां से अवकाश पर घर लौटा तो आतंकियों के एक मॉटिवेटर के संपर्क में आ गया।

इसके बाद वह बदल गया और पासपोर्ट के सहारे वाघा बॉर्डर के रास्ते वह पाकिस्तान में पढ़ने के लिए चला गया। पाकिस्तान में कुछ समय रहने के बाद वह वापस लौटा,लेकिन आतंकी बनकर।

इसके बाद वह अल-बदर के नेटवर्क को तैयार करने में जुट गया। सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2018 के अंत में या फिर 2019 की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर के सोपोर इलाके में वह सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में घाायल हो गया था। उसकी टांग में गोली लगी थी। अपने किसी ओवरग्राउंड वर्कर के जरिए उसने कुछ समय तक अपना उपचार कराया और फिर एलओसी पार गुलाम कश्मीर चला गया।

यही से शुरू किया आतंकी नेचवर्क का संचालन

गुलाम जम्मू कश्मीर पहुंचने के बाद पाकिस्तानी सेना ने उसका उपचार कराया और ठीक होने के बाद उसने वहीं से कश्मीर में अल-बदर के नेटवर्क को चलाना शुरु किया। वह सीमा पार से हथियार और पैसा भेजने के साथ ही अपने स्थानीय कैडर के लिए टारगेट भी तय करता था।

वर्ष 2020 में उसने बारामुला व कुपवाड़ा के रास्ते कश्मीर पहुंचे हथियार अधिकांश उसके ही नेटवर्क के लिए थे। इसके अलावा उसने जम्मू के रास्ते भी कश्मीर में हथयार पहुंचाए थे। सितंबर 2020 में कश्मीर में अल-बदर के पकड़े गए चार ओवरग्राउंड वर्करों के लिए उसने 20 लाख रूपये हवाला क जरिए भेजे थे।

बताया जाता है कि दक्षिण कश्मीर में 2018 गके दौरान एक ही रात में आठ पुलिसकर्मियों व उनके परिजनों को अगवा करने में अर्जमंद गुलजार का ही दिमाग था। वर्ष 2019 में कुलगाम में अल बदर के कमांडर जीनत उल इस्लाम उर्फ अबु अलकामा के मारे जाने के बाद उसकी रिश्तेदार युवती को आतंकियों ने मुखबिरी के आरोप में कत्ल कर दिया था। वह हत्या भी अर्जमंद के इशारे पर हुई था। कुलगाम के अर्रेह में दो जून 2022 को इलाकाई देहाती बैंक के मैनेजर विजय कुमार की हत्या भी उसके इशारे पर हुई थी।