जम्मू, ब्यूरो। सरकारी सुरक्षा के दायरे में रहकर आतंकियों की भाषा बोलने वाले हुर्रियत के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी समेत 18 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा जम्मू--कश्मीर प्रशासन ने वापस ले ली है। राज्य के 155 राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं की सुरक्षा भी घटा दी है। तीन दिन पहले जम्मू--कश्मीर प्रशासन ने हुर्रियत के उदारवादी गुट के चेयरमैन मौलवी मीरवाइज उमर फारूक समेत पांच अलगाववादियों की सुरक्षा भी वापस ले ली थी।

कराड़ों रुपए खर्च हो रहे थे
पुलवामा हमले के बाद सरकार की ओर से यह एक और बड़ा कदम है। देश में रहकर कश्मीर में देश विरोधी गतिविधियों को शह दे रहे इन अलगावादियों की सुरक्षा पर करो़ड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा वापस लेने और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा घटाने का फैसला बुधवार शाम जम्मू में गृह विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार ने की। इसमें मुख्य सचिव, पुलिस प्रशासन व गृह विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

फैसल व पर्रे भी शामिल
बैठक में राज्य में सुरक्षा के घेरे में रह रहे नेताओं को खतरे का आंकलन करने के बाद उन्हें मिलने वाली पुलिस सुरक्षा कम कर दी गई। राजनीतिक पार्टियों से जुड़े जिन 155 लोगों की सुरक्षा घटाई गई है, उनमें नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले आईएस अधिकारी शाह फैसल व वाहिद पर्रे भी शामिल हैं।

इनकी सुरक्षा वापस ली गई
सैयद अली शाह गिलानी, आगा सईद मोसवी, मौलवी अब्बास अंसारी, यासीन मलिक, सलीम जिलानी, शाहिद उल इस्लाम, जफ्फर अकबर भट्ट, नईम खान, मुख्तार अहमद वाजा, फारूक अहमद किचलू, मसरूर अब्बास अंसारी, आगा सईद अबुल हुसैन, अब्दुल गनी शाह व मोहम्मद मुसद्दिक मुख्य हैं। गृह विभाग ने हुर्रियत के 18 नेताओं में से सिर्फ 14 नेताओं के नाम ही सार्वजनिक किए।

एक हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी व 100 पुलिस वाहन हुए मुक्त
राज्य प्रशासन के इस ब़़डे फैसले से जम्मू कश्मीर पुलिस पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ काफी हद तक कम हुआ है। सुरक्षा वापस लेने व घटाने के फैसले से एक हजार से अधिक पुलिस कर्मी व सौ से अधिक वाहन मुक्त हुए हैं।

इससे पहले रविवार को राज्य गृह विभाग के आदेश पर आल पार्टी हुर्रियत काफ्रेंस के चेयरमैन मीरवाईज मौलवी उमर फारूक, प्रो अब्दुल गनी बट, बिलाल गनी लोन, शब्बीर शाह और हाशिम कुरैशी की सुरक्षा व अन्य सुविधाएं वापस ले ली गई। राज्‍य शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

मीरवाईज मौलवी उमर फारूक और प्रो अब्दुल गनी बट ने कहा था कि हमने कभी सुरक्षा नहीं मागी थी। अगर इसे हटाया जाता है तो हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। राज्य सरकार ने खतरे का आकलन कर हमें सुरक्षा दी थी। इसके जरिए हमारी गतिविधियों की निगरानी की जाती थी।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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