कश्मीर में सियासी हलचल के बीच गुलाम नबी आजाद का बड़ा बयान, रुहुल्लाह-इंजीनियर रशीद संग चर्चाओं पर तोड़ी चुप्पी
गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक वापसी और नए गठबंधन की अटकलों को खारिज किया है, साथ ही ...और पढ़ें

कश्मीर की सियासत में नई पारी की अटकलों पर आजाद का विराम। (फाइल फोटो)
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सियासत में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर उभरे असंतोष और बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने अपनी राजनीतिक वापसी और नए गठबंधन की अटकलों को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि न तो उनकी किसी राजनीतिक नेता से इस संबंध में बातचीत हुई है और न ही वह किसी नए राजनीतिक मोर्चे के गठन की तैयारी कर रहे हैं।
आजाद ने उन खबरों को गलत बताया, जिनमें उन्हें आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और बारामुला सांसद इंजीनियर राशिद के साथ संभावित गठबंधन से जोड़ा जा रहा था। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से उन्हें लगातार फोन और संदेश मिल रहे हैं, जिनमें कश्मीर लौटने और नए राजनीतिक समीकरण बनाने को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं।
आजाद ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली में हैं और फिलहाल जम्मू-कश्मीर आने का भी कोई कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक नेता से बातचीत कर सकते हैं और किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते, लेकिन सामान्य बातचीत को गठबंधन की तैयारी समझना गलत है। न तो किसी ने उनसे राजनीतिक समझौते के लिए संपर्क किया है और न ही उन्होंने ऐसी कोई पहल की है।
अनुच्छेद 370 पर गुप्त चर्चा के दावे को किया खारिज
आजाद ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ वर्ष 2024 या उससे पहले अनुच्छेद 370 पर बातचीत होने की खबरों को भी मनगढ़ंत बताया।
उन्होंने कहा कि तीनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर कभी अलग से बैठक नहीं हुई। उमर अब्दुल्ला की ओर से पहलगाम में बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में उनकी मुलाकात जरूर हुई थी, लेकिन वहां अन्य राजनीतिक प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इसे विशेष राजनीतिक चर्चा बताना तथ्यहीन है।
रूहुल्लाह का फैसला नेकां का अंदरूनी मामला
रुहुल्लाह मेहदी के नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होने और सांसद पद से इस्तीफे के फैसले पर आजाद ने हस्तक्षेप से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों में लोग आते-जाते रहते हैं और आंतरिक मतभेद होना सामान्य है।
उन्होंने वर्ष 2022 में कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाने का उदाहरण देते हुए कहा कि आंतरिक समस्याओं के कारण ही उन्होंने यह कदम उठाया था।
आजाद ने नेकां को जम्मू-कश्मीर की बड़ी राजनीतिक पार्टियों में शामिल बताते हुए कहा कि किसी बड़े संगठन में मतभेद असामान्य नहीं हैं।
राजनीतिक खींचतान से जनता को नहीं मिला फायदा
मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर आजाद ने कहा कि रूहुल्लाह के फैसले या पार्टी के भीतर असंतोष से तत्काल बड़े राजनीतिक बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक टूट-फूट नई बात नहीं है।
वर्षों से ऐसे घटनाक्रम होते रहे हैं, लेकिन आम जनता को इनसे कोई विशेष लाभ नहीं मिला। इसके बजाय प्रशासनिक व्यवस्था और लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी यह टिप्पणी हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद नेकां विधायकों में असंतोष की खबरों के बीच आई है।
नेताओं को दी नसीहत, पहले करें खबरों की पुष्टि
आजाद ने इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट राजनीतिक खबरों पर चिंता जताते हुए कहा कि सोशल मीडिया ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, लेकिन पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण है। खबर सार्वजनिक करने से पहले उसकी पुष्टि जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत सभी नेताओं से अपील की कि किसी दूसरे नेता के नाम से बयान सामने आने पर प्रतिक्रिया देने से पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे बात करें।
आजाद ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत हमलों में नहीं बदलना चाहिए। जम्मू-कश्मीर पहले ही कई चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में अपुष्ट खबरें और बयानबाजी जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर सकती हैं।
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