श्रीनगर, [राज्य ब्यूरो]। राजौरी में एलओसी पर पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए जंगबंदी के उल्लंघन और सोपोर में एक मुठभेड़ में दो आतंकियों की मौत के कुछ ही घंटों बाद रियासत के आंतरिक और बाहरी सुरक्षा परिदृश्य के साथ साथ  जंगबंदी व आतंकी हिंसा से निपटने की रणनीति  का जायजा लेने के लिए थलसेना प्रमुख जनरल विपिन रावत वीरवार को ग्रीष्मकालीन राजधानी पहुंचे। 

जनरल रावत ने इसी माह के अंतिम सप्ताह में शुरु हो रही श्री अमरनाथ की वार्षिक तीर्थ यात्रा के दौरान श्रद्घालुओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सुरक्षा क्वच की भी समीक्षा की। 

बीते एक माह के दौरान जनरल रावत का यह जम्मू कश्मीर का तीसरा दौरा है। इससे पूर्व वह पहली मई को पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों के सिर काटे जाने की घटना के अगले दिन आए थे और उसके बाद गत 17 मई को वह केंद्रीय रक्षामंत्री अरुण जेटली के साथ श्रीनगर में सुरक्षा परिदृश्य का जायजा लेने पहुंचे थे। 

जनरल रावत ने आज यहां ग्रीष्मकालीन राजधानी में उत्तरी कमान प्रमुख लेफिटनेंट जनरल अनबु , चिनार कोर प्रमुख लेफिटनेंट जनरल जेएस संधु व अन्य फील्ड कमांडरों के साथ एलओसी व अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी सेना द्वारा जंगबंदी के उल्लंघन से पैदा हालात और किसी भी युद् स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने आतंकरोधी अभियानों की समीक्षा करते हुए स्थानीय आतंकियों को मुख्यधारा में वापस लाने के उपायों पर भी संबधित अधिकारियों से चर्चा की। 

जनरल रावत ने इस मौके पर जवानों व अधिकारियों की कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए उन्हें किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हरदम तैयार रहने को कहा। उन्होंने एलओसी व अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दुश्मन के किसी भी दुस्साहस का मुंह तोड़ जवाब देने का निर्देश देते हुए घुसपैठियों को सरहद पर ही मार भगाने को कहा। 

स्थानीय हल्कों में जनरल रावत के आज हुए कश्मीर दौरे को बहुत अहमियत दी जा रही है। कश्मीर विशेषज्ञों के मुताबिक,जिस तरह से एलओसी पर बीते कुछ दिनों से जंगबंदी के घटनाओं में तेजी आयी है और मेजर गागोई को सम्मान के मुददे पर कश्मीर में अलगाववादी सियासत तेज हुई है, उसे देखते हुए यह दौरा बहुत अहम है।

उनके मुताबिक, उत्तरी कश्मीर में भी बीते एक पखवाड़े के दौरान भारतीय सेना व पाकिस्तानी सेना के बीच तनाव बड़ा है। दोनों तरफ एक दूसरे के खिलाफ छोटे स्तर पर कमांडो आप्रेशन भी हुए हैं। इसलिए यह दौरा महज आतंकरोधी अभियानों या फिर श्री अमरनाथ की यात्रा के प्रबंधों की समीक्षा तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए। 

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Posted By: Preeti jha

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