श्रीनगर, नवीन नवाज। पिता स्वर्गीय शेख मोहम्मद अब्दुल्ला द्वारा लागू किए गए कानून जन सुरक्षा अधिनियम के तहत अपने ही घर में कैद पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ फारुक अब्दुल्ला अब पूरी तरह से मजहबी हो गए हैं। उनका वक्त पांच वक्त की नमाज, पाक कुरान के अध्ययन और राज्य के पूर्व मुख्यसचिव की एक किताब पढ़ने में बीत रहा है। अलबता डाॅ फारुक अब्दुल्ला से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हरि निवास में एहतियातन हिरासत काट रहे उनके पुत्र व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अब मायूस नजर आने लगे हैं।

डाॅ फारुक अब्दुल्ला को गत 16 सितंबर से पीएसए के तहत उनके घर में बंदी बनाकर रखा गया है। उनके घर को सबसाइडरी जेल का दर्जा दिया गया है। पीएसए को वर्ष 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने ही राज्य में लागू किया था। पीएसए के तहत बंदी बनाए गए राज्य के तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ फारूक अब्दुल्ला से उनकी बड़ी बेटी साफिया और बहन सुरैया नियमित तौर पर मिल रही हैं। डाॅ अब्दुल्ला का मकान उनकी बहन और बेटी के मकान के बीच में ही स्थित है। तीनों मकानों के साथ जुड़े होने के कारण पहले वे पिछले दरवाजों से डाॅ अब्दुल्ला से मिलने जा सकती थीं, लेकिन अब उन्हें मुख्य दरवाजे से ही प्रवेश की अनुमति है। अकसर पार्टियों में बालीवुड के गानों पर थिरकने के अपने मस्तमौला अंदाज के कारण सुर्खियों में रहने वाले डाॅ अब्दुल्ला का अंदाज अब बदल गया है।

डाॅ अब्दुल्ला को जल्द हालात बेहतर होने की उम्मीद

डाॅ अब्दुल्ला की बहन सुरैया ने बताया कि भाई का मनोबल ऊंचा है। वह घबराए हुए नहीं हैं और उन्हें जल्द ही हालात के बेहतर होने की पूरी उम्मीद है। उनका किडनी ट्रांसप्लांट हो चुका है। पेसमेकर भी लगा है। वह शुग्गर के भी मरीज हैं। इसलिए मेरी भतीजी साफिया ही सुबह-शाम उनके लिए जेल मैन्युल के मुताबिक खाना ले जाती है। वह ही उन्हें दवाई भी देती है। पूरे दिन में वह पांच वक्त की नमाज अदा करते है, कुरान भी पढ़ते हैं। मेरे वालिद के समय मुख्य सचिव रह चुके मूसा रजा की किताब लैंड ऑफ रिग्रेटस भी पढ़ रहे हैं।

उदास और मायूस नजर आने लगे हैं उमर

मैं बीते कुछ दिनों के दौरान अपने भतीजे उमर अब्दुल्ला से भी मिल चुकी हूं। वह कुछ उदास और मायूस नजर आने लगा है। शायद उम्र और अनुभव का तकाजा है। हमारी पीड़ी ने, मैंने और मेरे भाई ने इस तरह के हालात पहले भी देखे हैं। हमने अपने पिता शेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी का लंबा दौर झेला है। उमर ने तो इस तरह के हालात को पहली बार झेला है। उसने जेल में अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली है। वह अकेला ही बंद है, कोई बात करने के लिए नहीं है। कल तक जो सुरक्षाकर्मी उसके आगे पीछे चलते थे, आज उसकी निगरानी कर रहे हैं। वह वहां सिर्फ पढ़ने, डीवीडी देखने, कसरत और सैर करने में ही अपना समय बिताता है। उसे टेलीविजन भी कुछ दिन पहले ही दिया गया है।

बेटी साफिया रोज मिल रही पिता से

वहीं डाॅ फारुक अब्दुल्ला की बेटी साफिया ने कहा कि सोमवार को सुरक्षाकर्मियों ने मुझे मेरे पिता से मिलने की दोपहर तक अनुमति नहीं दी। मेरे एतराज जताए जाने और उनकी सेहत का हवाला दिए जाने पर दोपहर बाद मेरे पिता के मकान के मुख्य गेट पर लगाई गई कंटीली तार को हटाया गया। उसके बाद मिलने की अनुमति दी गई। मैं अपने पिता से रोज मिल रही हूं। मैने जब अपने पिता से पीएसए को लेकर बातचीत की तो उन्होंने कहा कि यह तो होना ही था, सर्वाेच्च न्यायालय में उनकी रिहाई के लिए उनके दोस्त वायको ने एक याचिका दायर की थी। इसलिए पीएसए लगाया गया है ताकि रिहाई न हो। साफिया ने कहा कि डाॅ साहब का अधिकांश समय इबादत में बीतता है। इसके अलावा वह अब्दुल्ला यूसुफ अली द्वारा अनुवादित पाक कुरान का अध्यय और लैंड ऑफ रिग्रेट्स किताब पढ़ रहे हैं। उन्हें टीवी की सुविधा भी दी गई है। इसके अलावा वह सुबह-शाम लॉन में सैर करने के अलावा कुछ देर तक आंगन में खुली धूप में भी बैठते हैं।

करीब 1200 नेता व कार्यकर्ता एहतियातन हिरासत में

सनद रहे कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन के मददेनजर उपजी स्थिति में हालात को सामान्य बनाए रखने के लिए राज्य प्रशासन ने नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस,माकपा, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट और पीपुल्स कांफ्रेंस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 1200 नेताओं व कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया या उन्हें उनके घरों में नजरबंद रखा गया। इनमें राज्य के तीन पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुलला और पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती भी हैं। डाॅ फारुक अब्दुल्ला को गुपकार मार्ग पर स्थित उनके निवास जी-40 में ही नजरबंद रखा गया जबकि उमर अब्दुल्ला को हरि निवास में और महबूबा मुफ्ती को चश्मा शाही के पास बने एक सरकारी अतिथिगृह में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया है।

Posted By: Rahul Sharma

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