राज्य ब्यूरो, श्रीनगर : ¨सचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग के सचिव फारूक अहमद शाह ने बुधवार को कहा कि तय मानकों के मुताबिक काम करने में असमर्थ या काम नहीं करने वाले ठेकेदारों के आवंटित सभी ठेके रद किए जाएंगे।

उन्होंने बुधवार को उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ के खतरे को न्यूनतम बनाने के लिए जारी कार्य योजनाओं की समीक्षा करते हुए यह चेतावनी दी। बैठक में बताया गया कि झेलम दरिया और बाढ़ बिखराव नहर से गाद व सिल्ट निकालने के काम का पहला चरण मार्च 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा।

फारूक शाह ने बैठक में बाढ़ नियंत्रण विभाग के इंजीनियरों को जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने और बाढ़ से बचाव कार्यो के लिए तय लक्ष्य हासिल करने के लिए सही सोच अपनाने को कहा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत 399.29 करोड़ की लागत से फ्लड रिकवरी प्रोजेक्ट का प्रथम चरण शुरू किया गया। इसके तहत 142.33 करोड़ रुपये नहर के लिए जमीन के मुआवजा की मद में दिए गए हैं। 82 करोड़ रुपये नहर की फिर से मंजूरी के लिए चुकाए गए हैं। 35 करोड़ रुपये शरीफाबाद व नाईदखेई में दो पुलों के निर्माण पर खर्च हुए हैं। इसके अलावा झेलम दरिया के विभिन्न हिस्सों में सिल्ट व गाद निकालने के लिए 46 करोड़ खर्च किए गए हैं। जबकि खन्नाबल से बारामुला तक झेलम दरिया के किनारों पर बचाव कार्य पर 73 करोड़ खर्च हुए हैं। 20.96 करोड़ अन्य कार्यो पर खर्च हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ को कम करने की योजना के दूसरे चरण पर जल्द ही काम शुरू होगा। फिलहाल, 1684 करोड़ की अनुमानित लागत वाले दूसरे चरण के तहत सर्वे जारी है।

सचिव ने बैठक में अधिकारियों को झेलम व अन्य दरियाओं के साथ बाढ़ जल बिखराव नहरों पर किसी भी तरह के अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी अतिक्रमण हटाने में विलंब करता पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। जिन ठेकेदारों को काम आवंटित किए गए हैं, अगर वह काम की गुणवत्ता से समझौता करेंगे या काम को गति देने में असमर्थ होंगे तो उनके आवंटित टेंडर रद कर दिए जाएंगे।

Posted By: Jagran