370 हटने के 7 साल बाद कितना बदला जम्मू-कश्मीर? हड़ताल-पत्थरबाजी का दौर थमा, फिर भी बाकी हैं चुनौतियां
Jammu and Kashmir after Article 370: केंद्रशासित प्रदेश बनने के सात साल बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी, बंद और आतंकी घटनाओं ...और पढ़ें

घाटी में आतंकी घटनाओं में गिरावट, पर्यटन और निवेश में उछाल। (AI Generated)
HighLights
पत्थरबाजी, बंद, आतंकी घटनाओं में भारी कमी दर्ज।
पर्यटन में रिकॉर्ड वृद्धि, 2.36 करोड़ पर्यटक पहुंचे।
15,940 करोड़ का औद्योगिक निवेश, रोजगार के अवसर।
नवीन नवाज, श्रीनगर। लालचौक का घंटाघर अब सेल्फी प्वाइंट बन चुका है। यहां स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आए पर्यटक भी सुबह-शाम बेखौफ नजर आते हैं। डाउन-टाउन, सोपोर और त्राल जैसे इलाकों के नाम से अब पहले जैसा भय नहीं जुड़ता। जम्मू-कश्मीर में बीते सात वर्षों के दौरान बदले जनजीवन और सुरक्षा परिदृश्य की यह एक तस्वीर है।
हालांकि आतंकवाद की चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन संगठित पत्थरबाजी, बंद और अलगाववादी गतिविधियों के प्रभाव में उल्लेखनीय कमी के बीच 15,940 करोड़ का औद्योगिक निवेश और पर्यटकों की संख्या का 2.36 करोड़ के पार पहुंचना बता रहा है कि देश दुनिया का जम्मू कश्मीर में भरोसा मजबूत हुआ है।
पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने का फैसला किया और 31 अक्टूबर 2019 को जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तत्कालीन राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। इसके साथ ही प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का दौर शुरू हुआ।
पत्थरबाजी और आतंकी घटनाओं में गिरावट
केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद कानून-व्यवस्था में केंद्र सरकार और उपराज्यपाल प्रशासन की भूमिका बढ़ी। जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत हुआ। एनआइए, ईडी और अन्य एजेंसियों ने आतंकवाद के वित्तपोषण, हवाला नेटवर्क, अलगाववादी संगठनों और आतंकियों के मददगार तंत्र के विरुद्ध कार्रवाई तेज की।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में संगठित पत्थरबाजी की 1,328 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि 2023 और 21 जुलाई 2024 तक ऐसी कोई घटना दर्ज नहीं की गई। इसी तरह 2018 में 52 संगठित बंद हुए थे, जबकि 2023 में इनकी संख्या शून्य रही।
2018 में 228 और 2023 में 46 आतंकी घटनाएं
गृह मंत्रालय के संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, 2018 में 228 आतंकी घटनाएं हुई थीं, जो 2023 में घटकर 46 रह गईं। अलगाववादी नेटवर्क, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए तैयबा्र जैश जैसे आतंकी संगठनों की गतिविधियों और ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क पर भी सुरक्षा एजेंसियों ने कार्रवाई की।
खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और स्थानीय पुलिस तथा केंद्रीय एजेंसियों का तालमेल इस रणनीति का अहम हिस्सा रहा और मौजूदा समय में आतंकी गतिविधियां अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
हालांकि 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और सीमा पार से घुसपैठ और नए आतंकी नेटवर्क की सक्रियता बताती है कि सुरक्षाबलों की चुनौति अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी
सात वर्षों के दौरान राजनीतिक भागीदारी के मोर्चे पर भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में 58.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, आम चुनावों में यह पिछले 35 वर्षों का सर्वाधिक मतदान था।
इसके बाद सितंबर-अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव हुए और निर्वाचित सरकार का गठन हुआ। हालांकि राज्य का दर्जा बहाल करने और निर्वाचित सरकार के अधिकारों को लेकर बहस जारी है।
पर्यटन, निवेश और रोजगार को मिला विस्तार
सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव के साथ पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 2.11 करोड़ से अधिक पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे, जबकि 2024 में यह संख्या लगभग 2.36 करोड़ रही। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग, श्रीनगर और कटरा में पर्यटकों की आवाजाही से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबार को अवसर मिले।
बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में भी कई परियोजनाएं आगे बढ़ीं। केंद्र सरकार की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 80,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 63 प्रमुख विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें 51,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका था और 53 परियोजनाएं पूरी हो चुकी थीं।
वर्ष 2019 से मई 2026 के बीच 41,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी गईं, जबकि पिछले चार वर्षों में स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से 9.81 लाख से अधिक लोगों को अवसर उपलब्ध कराए गए।
सामाजिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं में बदलाव
अनुच्छेद 35ए समाप्त होने और केंद्रीय कानूनों के विस्तार से महिलाओं के अधिकारों, घरेलू हिंसा से संरक्षण तथा बच्चों के हितों से जुड़े कानूनी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में भी लागू हुए। सड़क, रेल, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित परियोजनाओं ने विकास की नई संभावनाएं पैदा की हैं।
चुनौतियां अभी बाकी
जम्मू कश्मीर मामलों के जानकार मीर इमरान के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की सात वर्षों की यात्रा में सुरक्षा, पर्यटन, निवेश और लोकतांत्रिक भागीदारी के क्षेत्र में बदलाव स्पष्ट हैं। लेकिन पहलगाम जैसे हमले बताते हैं कि शांति अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
युवाओं के लिए स्थायी रोजगार, निजी निवेश, स्थानीय व्यापार, राजनीतिक अधिकार और राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।
लालचौक की रौनक और पर्यटन स्थलों पर बढ़ती चहल-पहल बदलाव की तस्वीर जरूर पेश करती है, लेकिन इस बदलाव की स्थायी सफलता इस बात से तय होगी कि सुरक्षा के साथ आर्थिक अवसरों का विस्तार हो, लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को सम्मान मिले और आम नागरिक का भविष्य अधिक सुरक्षित तथा भरोसेमंद बने।
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