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अमरनाथ यात्रा 2026: श्रद्धालुओं संग बेजुबानों का भी ख्याल, 200 स्वयंसेवक रोज कर रहे 10 हजार घोड़े-खच्चरों की देखभाल

By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
Published: Tue, 14 Jul 2026 11:28 AM (IST)

अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं के साथ-साथ हजारों घोड़े-खच्चरों की भी विशेष देखभाल की जा रही है। 'पशु सेवा' पहल के ...और पढ़ें

अमरनाथ यात्रा में बेजुबानों का भी ख्याल, 'पशु सेवा' से 10 हजार पशुओं को मिल रही मदद। फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

अमरनाथ यात्रा में बेजुबानों का भी ख्याल, 'पशु सेवा' से 10 हजार पशुओं को मिल रही मदद। फोटो एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. 'पशु सेवा' पहल के तहत 10 हजार पशुओं की देखभाल।

  2. निःशुल्क चारा, स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक उपचार उपलब्ध।

  3. 200 स्वयंसेवक दिन-रात सेवा में जुटे, पोनी चालकों को राहत।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा की वार्षिक यात्रा केवल आस्था का संगम नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल भी बन रही है। कठिन पहाड़ी रास्तों पर श्रद्धालुओं को पवित्र गुफा तक पहुंचाने वाले हजारों घोड़े, खच्चर और अन्य भारवाही पशु भी इस यात्रा की रीढ़ हैं। इन्हीं बेजुबान साथियों की देखभाल के लिए 'पशु सेवा' नामक अनूठी पहल के तहत प्रतिदिन करीब 10 हजार पशुओं को निःशुल्क चारा, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

दिल्ली की समाजसेवी संस्था श्री पशुपति नाथ सेवक पिछले तीन वर्षों से पवित्र गुफा के समीप श्रद्धालुओं, पोनी चालकों और यात्रा से जुड़े अन्य लोगों के लिए पारंपरिक 56 भोग लंगर संचालित कर रही है। संस्था ने इस सेवा को केवल इंसानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यात्रा में अहम भूमिका निभाने वाले पशुओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की है।

संस्था के प्रतिनिधि राजीव सेठी ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान प्रतिदिन 8 से 10 हजार घोड़ों, खच्चरों और अन्य भारवाही पशुओं को चारा उपलब्ध कराया जाता है। उनके लिए स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक देखभाल की व्यवस्था भी की गई है।

उन्होंने कहा, 'ये पशु अमरनाथ यात्रा का अभिन्न हिस्सा हैं। श्रद्धालुओं को दुर्गम रास्तों से सुरक्षित मंज़िल तक पहुंचाने में इनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इनकी सेवा भी हमारी जिम्मेदारी है। भगवान की कृपा से पिछले तीन वर्षों से यह सेवा निरंतर जारी है और आगे भी जारी रहेगी।'

पानी और देखभाल का इंतजाम

राजीव सेठी के अनुसार, करीब 200 स्वयंसेवक पूरी यात्रा के दौरान दिन-रात इस सेवा में जुटे रहते हैं। यात्रा के पहले दिन से लेकर समापन तक टीम श्रद्धालुओं के साथ-साथ इन बेजुबान पशुओं की देखभाल भी पूरी निष्ठा से करती है।

इस पहल से सबसे अधिक राहत उन पोनी चालकों को मिली है, जिनकी रोज़ी-रोटी इन्हीं पशुओं पर निर्भर है। एक पोनी चालक ने कहा कि यात्रा के दौरान पर्याप्त चारे और पानी की व्यवस्था करना हमेशा आसान नहीं होता, ऐसे में यह सेवा उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रही है।

उन्होंने कहा, 'समय पर चारा और पानी मिलने से हमारे घोड़े स्वस्थ रहते हैं और श्रद्धालुओं को भी सुरक्षित यात्रा मिलती है। इससे हमारा खर्च कम होता है और हम अपने पशुओं की बेहतर देखभाल कर पाते हैं। बहुत कम लोग इन बेजुबानों के बारे में सोचते हैं। यह पहल वास्तव में हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।'

अमरनाथ यात्रा में जहां लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं 'पशु सेवा' जैसी पहल यह संदेश भी दे रही है कि सेवा का वास्तविक अर्थ केवल इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि उन बेजुबान जीवों तक भी पहुंचना है, जिनके बिना यह कठिन यात्रा संभव नहीं हो सकती।

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