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आगा रुहुल्लाह की रैली पर टिकी निगाहें, क्या नेकां के बागी विधायक और पुराने नेता भी होंगे शामिल? सियासी हलचल तेज

Published: Mon, 02 Nov 2026 05:10 PM (IST)

आगा सैयद रुहुल्ला की बडगाम रैली पर सबकी निगाहें टिकी हैं, जहां वे नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देने की तैयारी ...और पढ़ें

रुहुल्ला की रैली से पहले कश्मीर की सियासत में तेज हुई हलचल। (फाइल फोटो)

रुहुल्ला की रैली से पहले कश्मीर की सियासत में तेज हुई हलचल। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. रुहुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा देने की तैयारी में हैं।

  2. बडगाम में 3 नवंबर को महत्वपूर्ण रैली का आयोजन होगा।

  3. पार्टी की नीतियों, अनुच्छेद 370 पर रुहुल्ला का असंतोष।

नवीन नवाज, श्रीनगर। 'इस्तीफे का एलान', 'वादा बड़ा है कुर्सी से' और 'किरदार की सियासत, उसूलों की सियासत' जैसे नारों वाले पोस्टर बडगाम, श्रीनगर एयरपोर्ट मार्ग और कश्मीर के कई हिस्सों में दिख रहे हैं। पोस्टरों पर नेशनल कान्फ्रेंस के असंतुष्ट सांसद आगा सैयद रुहुल्ला और उनके दिवंगत पिता आगा सैयद मेहदी की तस्वीरें हैं। इनमें लोगों से तीन नवंबर, मंगलवार को बडगाम के बेहिश्त-ए-जेहरा पार्क में जुटने की अपील की गई है। रैली की सफलता या विफलता का असर जम्मू-कश्मीर, खासकर कश्मीर और सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस की राजनीति पर पड़ सकता है।

शिया समुदाय के बड़े वर्ग के धर्मगुरु भी रहे रुहुल्ला ने पार्टी के सत्ता में आने के पहले दिन से ही नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि पार्टी अपने मूल एजेंडे और कश्मीरियों की उपेक्षा कर भाजपा के एजेंडे पर काम कर रही है। उन्होंने चुनावी वादों से पीछे हटने और मुख्यमंत्री की अक्षमता पर भी सवाल उठाए हैं।

डा. अब्दुल्ला ने उन्हें चुनौती दी थी कि नीतियों से असहमति है तो इस्तीफा देकर चुनाव लड़ें। रुहुल्ला ने चुनौती स्वीकार की है और करीब दो महीने के जनसंपर्क अभियान के बाद मंगलवार को इस्तीफा देने की तैयारी की है। उन्होंने इसके लिए अपने पिता का बलिदान दिवस चुना है। आगा सैयद मेहदी तीन नवंबर 2000 को आतंकियों के आईईडी विस्फोट में बलिदान हुए थे।

रुहुल्ला को मनाने की कोशिशें बेनतीजा

पर्दे के पीछे रुहुल्ला को मनाने के प्रयास हुए, लेकिन उन्होंने अनुच्छेद 370 और 35ए की पुनर्बहाली के एजेंडे पर स्पष्ट रणनीति बनाने तथा आरक्षण के मुद्दे पर आगे बढ़ने की मांग की। उनका कहना है कि पार्टी अपने मूल एजेंडे पर चलने का भरोसा दिलाए और उससे पीछे हटने के लिए माफी मांगे, तभी वे इस्तीफे के फैसले पर पुनर्विचार कर सकते हैं। फिलहाल इसकी संभावना कम दिख रही है।

मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से नाराज विधायक

रैली इसलिए भी अहम है कि नेशनल कान्फ्रेंस के 25 विधायकों ने पार्टी की नीतियों पर असंतोष जताते हुए नेतृत्व को 10 सूत्री मांगपत्र भेजा है। हालांकि, राजनीतिक मामलों के जानकार आसिफ कुरैशी के अनुसार, विधायकों की नाराजगी और रुहुल्ला का विरोध अलग-अलग हैं। विधायक मंत्रिमंडल विस्तार में उपेक्षा से नाराज हैं, जबकि रुहुल्ला पार्टी की राजनीतिक दिशा, अनुच्छेद 370 और 35ए तथा चुनावी वादों को लेकर असहमत हैं।

रुहुल्ला असंतुष्ट विधायकों से संपर्क से इनकार कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनका विरोध सत्ता में हिस्सेदारी या मंत्रिमंडल में जगह तक सीमित नहीं है। नाराज विधायक भी फिलहाल पार्टी छोड़ने या अलग गुट बनाने से इनकार कर रहे हैं।

कौन-कौन पहुंचेगा रुहुल्ला के साथ?

रैली में कौन-कौन विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और पुराने संगठनात्मक नेता शामिल होते हैं, इससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति का संकेत मिलेगा। जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा है कि रुहुल्ला अकेले जाएंगे और इस्तीफा देने पर 'खुदा के हवाले' होंगे। ऐसे में रैली के मंच और रुहुल्ला के संबोधन पर सबकी नजर रहेगी।

रुहुल्ला बोले- यह उसूलों की लड़ाई

रुहुल्ला ने रैली की सफलता पर टिप्पणी से बचते हुए कहा कि उनके चुनाव में दक्षिण कश्मीर के मतदाताओं का बड़ा योगदान रहा है। पुलवामा और आसपास के क्षेत्रों में नेशनल कान्फ्रेंस की स्थिति से सभी परिचित हैं। उन्होंने इसे उसूलों की लड़ाई बताते हुए कहा कि यह लंबी होगी, लेकिन वे इससे डरते नहीं हैं।

उनके मुताबिक, 2015 में भाजपा से गठबंधन के बाद पीडीपी की ताकत घटकर तीन सदस्यों तक रह गई। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पारंपरिक दलों की जगह मजबूत विचारधारा वाली नई राजनीतिक ताकतों की जरूरत है। अगर सियासत या कुर्सी मेरा मकसद होता तो मैं रैली के लिए तैयार नहीं होता। मेरे लिए उसूल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

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