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जम्मू-कश्मीर: बकरियां चराते-चराते LoC पार पहुंच गई थी रूबीना, 5 दिन बाद सुरक्षित लौटी; मवेशी भी साथ आए

Published: Thu, 05 Nov 2026 11:26 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिला पुंछ की रूबीना 5 दिन बाद पाकिस्तान से सुरक्षित भारत लौट आईं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें ...और पढ़ें

अनजाने में LOC पार कर पहुंची पुंछ की महिला की घर वापसी। (Ai Generated)

अनजाने में LOC पार कर पहुंची पुंछ की महिला की घर वापसी। (Ai Generated) 

HighLights

  1. रूबीना कौसर पांच दिन बाद पाकिस्तान से सुरक्षित लौटीं।

  2. अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान पहुंच गई थीं।

  3. भेड़-बकरियों सहित चकां दा बाग क्रॉसिंग से वापसी हुई।

जागरण संवाददाता, पुंछ। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिला पुंछ के किरनी गांव से अनजाने में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार कर पाकिस्तान पहुंची 44 वर्षीय रूबीना कौसर बुधवार को पांच दिन बाद सुरक्षित भारत लौट आईं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने चकां दा बाग क्रॉसिंग पॉइंट के माध्यम से उन्हें उनकी भेड़-बकरियों सहित भारतीय अधिकारियों के हवाले कर दिया। रूबीना की सुरक्षित वापसी से उनके परिवार और गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है।

जानकारी के अनुसार, रूबीना कौसर पत्नी मुहम्मद शफीक निवासी किरनी गांव पांच दिन पहले रोजमर्रा की तरह अपनी भेड़-बकरियों को चराने के लिए घर से निकली थीं।

इसी दौरान वह अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गईं। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण इस घटना के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई थी। परिजनों को उनकी सुरक्षा और वापसी को लेकर लगातार चिंता सता रही थी।

घटना की जानकारी मिलते ही अधिकारियों ने शुरू की वापसी की प्रक्रिया

घटना की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय अधिकारियों की ओर से उनकी सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस प्रकार अनजाने में सीमा पार करने के मामलों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच निर्धारित प्रक्रिया के तहत संपर्क और समन्वय किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत रूबीना की वापसी का रास्ता साफ हुआ।

रूबीना के साथ भेड़-बकरियां भी लौटाईं

बुधवार को पाकिस्तानी अधिकारियों ने चकां दा बाग क्रॉसिंग पॉइंट पर रूबीना कौसर को उनकी भेड़-बकरियों सहित भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया। इसके बाद उनकी भारत वापसी सुनिश्चित हुई। खास बात यह रही कि रूबीना के साथ उनके पशुधन को भी वापस किया गया, जिससे परिवार को दोहरी राहत मिली है।

रूबीना के परिजन उनकी वापसी का इंतजार कर रहे थे। पांच दिनों तक चली चिंता और अनिश्चितता के बाद जब उनके सुरक्षित लौटने की खबर मिली तो परिवार में खुशी का माहौल बन गया। किरनी गांव के लोगों ने भी उनकी वापसी पर राहत जताई।

सीमावर्ती पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए पशुओं को चराने और रोजमर्रा के कामों के दौरान विशेष सतर्कता बरतना जरूरी होता है।

कई बार भौगोलिक परिस्थितियों और सीमावर्ती क्षेत्र की स्थिति के कारण लोग अनजाने में सीमा के पार पहुंच जाते हैं। रूबीना की सुरक्षित वापसी ने एक बार फिर सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सतर्कता के महत्व को सामने ला दिया है।

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