गगन कोहली, राजौरी :

रमजान का पवित्र माह चल रहा है। इस माह को इबादत का माह भी कहा जाता है, लेकिन पाक सेना इस पाक पवित्र माह में भी अपनी नापाक हरकतों को जारी रखे हुए है। रमजान माह में सुबह सेहरी व शाम को इफ्तारी का विशेष प्रबंध किया जाता है, लेकिन पाक गोलाबारी में न तो सुबह सही ढंग से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोग सेहरी कर पा रहे हैं और न ही शाम के समय इफ्तारी।

सुबह सेहरी के समय भी सीमा पार से पाक सेना की गोलाबारी जारी रहती है और शाम को जब इफ्तारी का समय आता है तो उस समय भी पाक सेना भारी गोलाबारी शुरू कर देती है। इफ्तारी के लिए लोगों ने जो कुछ थोड़ा बहुत बनाया होता है वह भी वहीं पर धरा रह जाता है। लोग एक कमरे में ही डर सहम कर बैठ जाते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं कि सीमा पर शांति को कायम रखने के साथ-साथ सभी को सुरक्षित रखे।

राजौरी जिले के मंजाकोट सेक्टर के तरकुंडी, नक्का पंजग्राई, चेरी गली, गंभीर आदि गांवों के रहने वाले मुहम्मद असलम, परवेज अहमद, हाजी रहमान आदि ने बताया कि पिछले कई दिनों से पाक सेना हर रोज सुबह सेहरी के समय व शाम को इफ्तारी के समय गोलों की बरसात शुरू कर देती है। हम लोग न तो सही ढंग से सेहरी कर पा रहे हैं और न ही इफ्तारी। इतना ही नहीं रमजान के माह में रात के समय नमाज पढ़ी जाती है। से तरावी कहते हैं। वह भी हम नहीं पढ़ पाते हैं। उस समय लोग अपनी जान बचाने के प्रयास में होते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले कभी इस तरह की गोलाबारी नहीं देखी, जो पिछले कुछ दिनों में देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि गोलाबारी से हर कोई परेशान है। इससे पहले रमजान माह में गोलाबारी काफी कम होती थी, लेकिन इस बार पाक सेना ने अपने सभी रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए और रिहायशी क्षेत्रों को निशाना बनाकर गोलाबारी कर रही है। रमजान माह में इबादत का मौका भी नहीं मिल रहा

सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि रमजान माह में लोग अपना दिन अल्लाह को याद करने में ही निकाल देते हैं। कोरोना लॉकडाउन के चलते हर कोई घर पर ही है और बाहर कहीं जाना नहीं होता तो लोग घरों में ही रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं। लेकिन पाक सेना की गोलाबारी के चलते रमजान माह में इबादत का मौका भी नहीं मिल रहा है। क्योंकि पाक सेना लगातार गोलाबारी को जारी रखे हुए है और पाक सेना द्वारा दागे जा रहे गोले हम लोगों के घरों के आसपास आकर गिर रहे हैं। ऐसे माहौल में इबादत किस तरह हो सकती है। लोगों के जेहन में बस अपनी व अपने परिवार के सदस्यों की जान की चिता बनी रहती है।

Posted By: Jagran

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