राकेश शर्मा, कठुआ। पापा के देहांत के बाद बूढ़ी दादी, मां और दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी छोटी बात नहीं थी। विपरीत परिस्थितियां और मुश्किल हालात, मदद मांगें भी तो किससे? ऐसे में दुर्गा बनी परिवार की बड़ी बेटी प्रियंका ने वह कर दिखाया जो बेटों से उम्मीद की जाती है। उन्होंने जीवन के हर संघर्ष का सामना करते हुए पापा के पुलिस अफसर बनने के सपने को पूरा करने के लिए कश्मीर पुलिस सेवा (केपीएस) की परीक्षा दी जिसमें सफल रहीं। आज प्रियंका कठुआ में जम्मू-कश्मीर पुलिस में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट (डीएसपी) पद पर तैनात हैं।

प्रियंका बताती हैं कि पापा (अंचल कुमार) कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही मुझे पुलिस अफसर बनने के लिए प्रेरित करते थे। वर्ष 2012 में अचानक उनके निधन से सब कुछ ठहर सा गया। मानो परिवार की जिंदगी की गाड़ी ट्रैक से उतर गई हो। सभी उन्हीं पर निर्भर थे। पिता का ट्रांसपोर्ट का कारोबार था। परिवार में ऐसा कोई नहीं था, जो संभाल सके। मैंने उसी समय आइटी से इंजीनिय¨रग पूरी की थी।

साजिशें होने लगीं

जम्मू के सांबा जिले के बड़ी ब्राह्मणा की रहने वाली प्रियंका बताती हैं कि सबसे ज्यादा दुख तब हुआ जब समाज के कुछ लोगों की घटिया सोच सामने आई। आसपास के लोग ही संपत्ति को सस्ते में छीनने की साजिशें रचने लगे। मैं परेशान थी। किसी तरह से स्वयं और परिवार को संभाला। ट्यूशन पढ़ानी शुरू की। कोचिंग सेंटर ज्वाइन कर जैसे-तैसे घर को चलाया।

घबराएं नहीं, संघर्ष करें

वर्ष 2013-14 में प्रियंका ने केएएस की परीक्षा दी जिसमें वह सफल हुईं और वर्ष 2016 में पुलिस में बतौर ऑफिसर नियुक्त हुईं। वह बताती हैं कि परिवार का पूरा सहयोग रहा। अब लगता है कि अगर जीवन में ऐसी परिस्थितियां कभी बन जाएं तो घबराएं नहीं, बल्कि संघर्ष करना सीखें। मंजिल मिल ही जाती है, रास्ते खुद व खुद बन जाते हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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