- हाईवे के बीच धरना देकर कर्मियों ने 10 किमी लखनपुर से कठुआ तक रोष जुलसू निकाला

- जुलुस के चलते हाईवे पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को करनी पड़ी कड़ी मशक्कत

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जागरण संवाददाता, कठुआ : 52 माह का बकाया वेतन जारी करने की मांग को लेकर पिछले 6 दिन से काम छोड़ हड़ताल पर पीएचई विभाग के डेलीवेजरों ने बुधवार अपना संघर्ष और तेज कर दिया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हजारों की संख्या में कर्मियों ने राज्य के मुख्य प्रवेश द्वार लखनपुर में धरना देकर यातायात जाम करके राज्य सरकार के समक्ष अपना कड़ा रोष जताया। लखनपुर से लेह तक जारी हड़ताल को सफल बनाने के लिए कर्मियों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए हाईवे पर करीब 10 किलोमीटर लंबी रोष रैली निकाली। कर्मियों के रोष और संख्या को देखते हुए लखनपुर में सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई थी। डीएसपी निखिल रसगोत्रा के नेतृत्व पुलिस बल ने हाईवे पर कर्मियों के धरने और रोष रैली के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। करीब 12 बजे तक लखनपुर में एकत्रित होकर कर्मियों ने सरकार व राज्य प्रशासन के खिलाफ हल्ला बोलने की तैयारी शुरू कर दी। एक घंटे तक वहां प्रदर्शन करने के उपरांत कर्मी रोष रैली की शक्ल में हाईवे से होकर कठुआ जिला मुख्यालय पहुंचे। रैली के चलते हाईवे पर यातायात भी बाधित हुआ, लेकिन पूरी तरह से ठप नहीं हुआ। इस दौरान पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

ऑल जे एंड के पीएचई आइटीआइ ट्रेनड, सीपी वर्कर्स, लैंड डोनर्स एंड इंप्रेस्ट वेजर्स एसोसिएशन डिस्ट्रक्ट कठुआ के बैनर तले प्रदर्शन करते हुए कर्मियों ने सरकार के खिलाफ उनकी जायज मांगों को लेकर विगत कई वषरें से की जा रही अनदेखी को लेकर सरकार व राज्य प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। एसोसिएशन के प्रांतीय प्रधान तनवीर हुसैन ने इस मौके पर सरकार पर बरसते हुए कहा कि आज उनका लखनपुर में टोल टैक्स पोस्ट बंद कर हाईवे से कठुआ तक रैली निकालने का कार्यक्रम था ताकि आंख बंद कर सोई राज्य सरकार जागे। अगर अभी भी सरकार ने उनकी मुख्य मांग 52 माह का लंबित वेतन जारी नहीं किया तो उनका संघर्ष और तेज होगा और वो परिवार सहित सड़कों पर उतरेंगे और पानी की एक बूंद तक नहीं गिरने देंगे। इससे पहले अगर सरकार आज के प्रदर्शन के बाद भी कोई कदम नहीं उठाती है तो उनका अगला प्रदर्शन 15 सितंबर को जम्मू स्थित प्रेस क्लब गिरफ्तारी के साथ होगा। हुसैन ने बताया कि राज्य में इस समय विभिन्न विभागों में 64 हजार के करीब डेलीवेजर्स कर्मी हैं, जो विभिन्न ट्रेड में काम कर रहे हैं। इसमें सिर्फ 22 हजार पीएचई के डेलीवेजर्स शामिल हैं, जिन्हें ढाई साल से वेतन नहीं दिया गया है। हद तब हो गई, जब ईद, रक्षाबंधन और जन्माष्टमी के त्योहार पर भी कोई वेतन जारी नहीं किया गया। उनके बच्चे स्कूल में फीस तक नहीं दे पा रहे हैं। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। अब तो मामला सिर्फ वेतन तक सीमित नहीं है, उन्हें स्थायी करने और एसआरओ 520 को भी जारी असमंजस को दूर कर लागू करना भी है, उसके लिए भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। पूर्व सरकारों ने भी उनकी कोई सुनवाई नहीं की और मौजूदा सरकार ने भी। जम्मू के 25 विधायक भी उनकी मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। अगर सरकार ने अभी भी उनकी मांगों को हल नहीं किया तो आने वाले चुनाव में उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अगर राज्य में आंगनबाड़ी, एसएसए शिक्षक और आशा वर्कर्स सहित उनके कर्मी इकट्ठे होकर सड़क पर उतर गए तो सरकार की ईट से ईट बजाकर रख देंगे। आज स्किल इंडिया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, लेकिन जहां वेतन के लिए लाले पड़े हैं। अब उनका संघर्ष रुकने वाला नहीं है, जहां राज्य सरकार ने हल नहीं किया तो दिल्ली तक भी पहुंचेगा प्रदर्शन में विभिन्न जिलों के कर्मियों के नेता प्रांतीय उपप्रधान दीपक गुप्ता, सांबा के जिला रमण खजूरिया, विजयपुर के दर्शन कुमार, हीरानगर के अशोक कुमार, बिलावर के बीरबल जलमेरिया, रामनगर के सुभाष चंद्र और कठुआ से शिवनारायण सिंह, प्रवीण सिंह और नरेंद्र सिंह मुख्य रूप से शामिल रहे।

Posted By: Jagran