राकेश शर्मा, कठुआ

राज्य प्रशासन, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड, पुलिस और लखनपुर टोल के अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं होने का खामियाजा अमरनाथ यात्रियों के लिए लंगर सेवा मंडल के सेवादारो को भुगतना पड़ा। उन्हें पिछले 48 घंटे से रोककर रखा गया। कभी उन्हें अनुमति पत्र न होने की बात कहकर रोका तो कभी हाईवे पर एकतरफा यातायात का बहाना बनाया गया। सोमवार को रात तक वह लखनपुर से बाहर नेशनल हाईवे के किनारे खुले में इंतजार कर रहे थे कि कब उनके लिए गेट खोला जाए। वहीं, उनसे देर रात को कहा गया कि मंगलवार की सुबह छह बजे कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें राज्य में प्रवेश करने दिया जाएगा।

प्रशासन के रवैये से हताश लंगर सेवादारों का कहना है कि आखिर वह अमरनाथ यात्रा में सेवा ही तो करने आए हैं, लेकिन राज्य प्रशासन ने उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया। यह समझ से परे है। राज्य प्रवेश द्वार पर दस से अधिक लंगर सेवा मंडलों के 45 से अधिक वाहनों को रोककर रखा गया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें रोका ही जाना था तो उनके लिए रहने खाने का इंतजाम ही कर दिया जाता। प्रशासन ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया। भीषण गर्मी में उन्हें परेशान होना पड़ा।

हैरत की बात यह रही कि जिला प्रशासन को कोई भी अधिकारी लंगर के ट्रकों को रोकने का स्पष्ट कारण नहीं बता पाया। कोई अधिकारी कह रहा कि लंगर के ट्रकों को रोकने की कोई अनुमति नहीं है तो किसी ने कहा कि सोमवार शाम को छोड़ा जाएगा। फिर यह कहा जाता है कि मंगलवार की सुबह प्रवेश की अनुमति मिलेगी। अलबत्ता यह जरूरत स्पष्ट कि जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच कोई तालमेल नहीं रहा। इसका खामियाजा लंगर सेवादारों ने भुगता। पूरे दिन बैठाए रखा डीसी ऑफिस में

लखनपुर में दो दिन से रुके लंगर सेवक मंडलों में कठुआ प्रशासन के खिलाफ भारी रोष रहौ। राज्य प्रशासन के संज्ञान में मामला आने पर सोमवार को कठुआ पुलिस ने लंगर सेवादारों को बात करने के लिए लखनपुर से डीसी कार्यालय में बुलाया। सेवादार सुबह 10 बजे डीसी कार्यालय पहुंच गए। लेकिन यहां प्रशासन और पुलिस की बैठक के बाद आदेश का इंतजार करते रहे। शाम चार बजे लंगर सेवकों से कहा गया कि आला अधिकारियों से बात हुई है, शाम तक उन्हें छोड़ा जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

प्रशासन उन्हें दो दिन से लखनपुर में रोके रखा। भीषण गर्मी में वह बेहद परेशान रहे। उनके पास लंगर लगाने का समय बहुत कम रह गया है। उन्हें लंगर लगाने की तैयारियां करने के लिए कम से कम 20 दिन पहले पहुंचना होता है।

-अनिल, लंगर सेवादार राज्य प्रशासन का हमेशा से यात्रा के दौरान ऐसा नाटक होता है। अगर प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें लखनपुर से छोड़कर घगवाल, वहां पर प्रदर्शन करने के बाद जम्मू में रोक लिया जाता है। प्रदर्शन करने का कोई फायदा होने की बजाय और परेशानी ही होती है। सोमवार शाम तक नहीं छोड़ने पर प्रदर्शन भी किया।

-परमिंदर, लंगर सेवादार, सिरसा कड़ी धूप के बीच हाईवे किनारे बिछौना

बाबा बर्फानी के लाखों भक्तों के लिए खाने का इंतजाम करने वाले लंगर सेवादारों ने लखनपुर में ढेर मुसीबतें झेलीं। दो दिन से प्रशासन ने रोके रखा। लंगर सेवादार लौट भी नहीं सकते थे। ऐसे में हाईवे के किनारे ही खुले में बिछौना लगाकर गेट खुलने का इंतजार करते रहे। तेज धूप और भीषण गर्मी में खुद के लिए खाना बनाने हुए सेवादारों को देखा गया। इस बार जितनी नाराजगी लंगर सेवादारों में दिखी उतनी पहले कभी नहीं रही।

अफसरों की कभी हां तो कभी न रही

जिले के एएसपी रमनीष गुप्ता ने बताया कि रविवार को नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक जम्मू की ओर होने के चलते लंगरों के वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। अगर आदेश आता है तो सोमवार की शाम को या मंगलवार सुबह छह बजे छोड़ा जाएगा। वहीं, लखनपुर के टोल टैक्स के डीसी आशीष गुप्ता एक दिन पहले कहा था कि लंगर सेवकों के पास कोई लिखित अनुमति नहीं है। वहीं सोमवार को इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने अपने ही बयान का खंडन कर दिया। कहा कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा था, बल्कि ये कहा था कि ये पुलिस का मामला है। जितेंद्र ने आइजी से की बात

लखनपुर में लंगर सेवकों को रोकने के मामले को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संज्ञान लिया है। उन्होंने जम्मू के आइजी से बात कर सेवकों को लखनपुर से आगे बढ़ने की अनुमति देने को कहा है। ये जानकारी जिला भाजपा प्रधान प्रेम नाथ डोगरा ने दी। उन्होंने बताया कि लंगर सेवकों को गत दिवस से लखनपुर में रोकने कर मामला जब उनके संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने तुरंत आइजी जम्मू से बात की।

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Posted By: Jagran

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