संवाद सहयोगी, रामकोट:

पशु तस्करी रोकने की माग के बावजूद यह धंधा जोर-शोर से इलाके में फल फूल रहा है। लोग घरेलू इस्तेमाल की आड़ में पशुओं को कश्मीर की तरफ ले जाते हैं। इसके लिए तस्कर बाकायदा परमिशन लिए रहते हैं, परंतु न ही इस परमिशन पर पशु चिकित्सालय की मोहर लगी होती है और न ही उस जगह का पता लिखा होता है, यहा से ये लोग पशुओं को खरीदते हैं।

ऐसा ही एक मामला शनिवार को रामकोट में देखने को मिला। रामकोट पुलिस ने सूचना पर उधमपुर की तरफ जा रहे एक लोड कैरियर ( जेके 08 जी 16 80) को रोका, जिसमें दो बैल लदे हुए थे। पशुओं को ले जा रहे व्यक्ति इकबाल मोहम्मद पुत्र हाशिम दीन निवासी जोहनू (जगानू) ने बताया कि उसने यह पशु बसोहली से खरीदे हैं, परन्तु उसे पास पशुओं को खरीदने की कोई रसीद नहीं मिली। उसके पास एक डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ऊधमपुर की परमिशन थी, जिस पर पशुओं को जिला कठुआ से जिला उधमपुर के जोहनू गाव ले जाने की तारीख 17 जून 2019 दर्ज थी। परंतु कहा से खरीदे गए, कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला। जिस पर आपत्ति जताते हुए स्थानीय लोगों ने इसे झूठी परमिशन बता कर गाड़ी को आगे नहीं जाने दिया।

चौकी प्रभारी सुमित मगोत्रा ने स्थिति को भापते हुए लोड कैरियर गाड़ी को पशुओं को बसोहली वापस छोड़ आने की हिदायत दी। विहिप के जिला प्रधान पवन शर्मा, तहसील प्रधान दिनेश खजूरिया, बजरंग दल के जिला प्रधान विजय शर्मा, कैप्टन पूर्ण चंद, कैप्टन तारा चंद, गौ रक्षा समिति के प्रधान महेंद्र सिंह मनकोटिया, तहसील प्रभारी बलवीर सिंह आदि ने बताया कि ईद से पहले रोजाना रात के समय रामकोट क्षेत्र से हजारों की संख्या में पशुओं को गुप्त रास्तों से ऊधमपुर की तरफ ले जाया जाता रहा। इनमें कुछ पशु परमिशन पर ले जाए जाते रहे और बाकी के बिना परमिशन गुप्त रास्ते से ऊधमपुर की तरफ, वहा से कश्मीर की तरफ ले जाते रहे। परंतु किसी भी अधिकारी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। इसी तस्करी को रोकने के लिए मजालता पुलिस ने बट्टल चौक पर पशुओं को रोकने की कोशिश की। जिस पर तस्करों ने लाठी-डंडों से पुलिस व अन्य स्थानीय लोगों की पिटाई कर दी थी और पथराव भी किया इस हमले में दर्जनों पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल भी हुए थे। लोगों ने डिप्टी कमिश्नर कठुआ और एसएसपी कठुआ से इस बाबत तह तक जाने की माग की है।

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Posted By: Jagran