विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सन्याल में नागदेवता के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, दूध और रोट चढ़ाकर मांगी मन्नतें

Published: Mon, 14 Sep 2026 10:21 AM (IST)

सन्याल के बाबा सुरगल एवं नागदेवता देवस्थान पर नागपंचमी मेले का शुभारंभ हो गया है, जहाँ नागपंचमी से एक सप्ताह पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

हीरानगर के सन्याल में नागपंचमी मेले की धूम।

हीरानगर के सन्याल में नागपंचमी मेले की धूम।

HighLights

  1. सन्याल में नागपंचमी मेले का पारंपरिक रूप से शुभारंभ हुआ

  2. सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नागदेवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि मांगी

  3. देवस्थान कमेटी ने भक्तों के लिए लंगर व अन्य व्यवस्थाएं कीं

संवाद सहयोगी, हीरानगर। उपमंडल के कंडी क्षेत्र के सन्याल स्थित बाबा सुरगल एवं नागदेवता के देवस्थान पर नागपंचमी मेले का शुभारंभ हो गया है। हालांकि, नागपंचमी का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा, लेकिन यहां पारंपरिक रूप से मेला करीब एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाता है।

रविवार को क्षेत्र के दूरदराज गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु देवस्थान पर पहुंचे और नागदेवता के दर्शन कर दूध, रोट आदि चढ़ाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

मेले को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखा। सुबह से ही देवस्थान पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं के लिए मन्नतें मांगीं।

सन्याल स्थित नागदेवता का यह देवस्थान क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर वर्ष नागपंचमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। देवस्थान कमेटी की ओर से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर, आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

देवस्थान कमेटी के सदस्य एवं पूर्व सरपंच सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि सन्याल में बाबा सुरगल एवं नागदेवता के स्थान पर हर वर्ष नागपंचमी के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है।

परंपरा के अनुसार नागपंचमी से करीब एक सप्ताह पहले ही श्रद्धालुओं का देवस्थान पर पहुंचना शुरू हो जाता है। रविवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।

कमेटी की ओर से उनके लिए लंगर सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। नागपंचमी मंगलवार को मनाई जाएगी और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नागदेवता के प्रति क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था है और हर वर्ष दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: 45 वर्षीय मूक-बधिर रेनू हंस ने 82% अंकों से पास की 10वीं, बेटे ने निभाई 'गुरु' की भूमिका