जम्मू, जागरण संवाददाता: शहर के चौदह बड़े नाले मंदिरों के शहर जम्मू की जीवनदायिनी सूर्यपुत्री तवी नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। इन्हें तवी में जाने से रोकने के लिए प्रोजेक्ट बना तो है लेकिन अभी तक जमीन पर नहीं उतरने से शहर की गंदगी नालों से होते हुए तवी में जा रही है। तवी के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम इसके किनारे लगाए जा रहे गंदगी के ढेर कर रहे हैं।

सूर्यपुत्री तवी नदी के जख्मों पर मरहम लगाने के दावे वर्षों बाद भी हवाई ही हैं। अभी तक न तो शहर के चौदह बढ़े नालों को इसमें पड़ने से रोका जा सका है और न ही शहर की गंदगी को ठिकाने लगाने के लिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट ही शुरू हो पाया। हालत यह है कि आज भी सारे शहर की गंदगी नालों से होते हुए तवी नदी में पहुंच रही है।

यह स्थिति तब है जब सरकार ने सूर्यपुत्री तवी नदी को साबरमती की तर्ज पर विकसित करने की योजना तो बनाई है। यह प्रोजेक्ट भी पिछले तीन वर्षों से फाइलों में घूम रहा है। अगले कुछ महीनों में इस पर काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। नालों को तवी में पड़ने से रोकने के लिए प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणाएं पिछले बारह सालों से हो रही हैं लेकिन ऐसा कोई प्रोजेक्ट फिलहाल सिरे नहीं चढ़ा।

वहीं जम्मू नगर निगम ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद तवी नदी किनारे भगवती नगर में कचरा फेंकना तो बंद कर दिया है लेकिन अभी भी इसके किनारों में कचरे के ढेर फेंके जा रहे हैं। इतना ही नहीं इसका खनन भी पूरी तरह रुक नहीं पाया है। करोड़ों रुपये खर्च कर तवी किनारे महाराजा हरि सिंह पार्क तो बनाया गया लेकिन इसके आसपास तवी में नालों से गिरती गंदगी बदबू फैला रही है।

वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने नहीं लगाया जा रहा कचरा: जम्मू शहर से प्रतिदिन करीब चार सौ मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण अभी तक शुरू नहीं हो सका। पहले भगवती नगर में इस कचरे को फेंका जाता था। अब इसे कोट भलवाल में ठिकाने लगाया जा रहा है। शहर की गंदगी तो प्रदूषण का सबब बन ही रही है। सबसे घातक अस्पतालों से निकलने वाला सैकड़ों टन डीग्रेडेबल और नॉन-डीग्रेडेबल वेस्ट भी है। सबसे घातक नॉन-डीग्रेडेबल वेस्ट होता है जो नष्ट नहीं होता और वातावरण के लिए काफी संक्रमित होता है। इस वेस्ट से कई बीमारियां जैसे एग्जिमा, तपेदिक, कैंसर, एलर्जी, अस्थमा आदि फैलती हैं। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शुरू नहीं होने से कचरे का अभी तक वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं हो पाया। अलबत्ता बंधुरक्ख और भगवती नगर में एक युनिट लगाकर निगम ने कचरे का अलगाव कर प्लास्टिक को अलग से ठिकाने लगाने की कवायद शुरू कर दी है।

वेयर हाउस में तवी किनारे फेंका जा रहा कचरा: पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकारी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जम्मू नगर निगम ने वेयर हाउस के नजदीक तवी नदी किनारे कचरा जमा करने का प्वाइंट बना लिया है। तवी नदी पर बने चौथे पुल को जोड़ने वाले मार्ग के साथ से निगम के वाहन कचरे को तवी के किनारे फेंकते हैं। यहां से कचरे को हालांकि बड़े वाहनों में उठाया जाता है कि लेकिन हर समय यहां कचरे के ढेर लगे ही रहते हैं। इससे आसपास गंदगी का आलम है। बदबू फैली हुई है। इसका विरोध स्थानीय लोग भी कर चुके हैं। विरोध के बाद निगम ने सड़क किनारे से तवी के बीच जाकर खाली जगह में इस कचरे को अनलोड करना शुरू किया हुआ है।

  • कोट भलवाल में वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निस्तारण के लिए सालिड वेस्ट मैनजमेंट प्रोजेक्ट पर काम जल्द शुरू करने जा रहे हैं। इसके अलावा बंधुरख व भगवती नगर में कचरे में से प्लास्टिक के लिफाफे आदि को अलग करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इससे आधा कचरा यहीं समाप्त हो जाता है और शेष को को भलवाल में ठिकाने लगा दिया जाता है। ऐसे ही शहर में तीन कचरा स्थानांतरण स्टेशन बनाए जा रहे हैं ताकि कचरे को निस्तारण सरल हो सके। शहर को स्वच्छ बनाना हमारी प्राथमिकता है। इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। हर घर से कचरा उठाने की प्रक्रिया भी लगभग सारे शहर में शुरू कर चुके हैं। आने वाले दिनों में इसके परिणाम दिखेंगे। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निगम ने काफी कदम बढ़ाए हैं। हमने शहर के खाली स्थानों, पार्कों में पौधारोपण किया है। मुख्य सड़कों, फ्लाईओवर व पुलों पर पौधे लगाए हैं। आने वाले समय में बदलाव दिखने लगेगा। - मेयर चंद्र मोहन गुप्ता

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप