जम्मू, अश्विनी शर्मा। ...जब देश में थी दीवाली, वो खेल रहे थे होली, जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली...। कवि प्रदीप के लिखे गीत और लता मंगेशकर के गाए गीत के प्रत्येक शब्द से हमारा सीना देश के असली नायकों (सेना) की बहादुरी से चौड़ा होता है। आज देश हर्षोल्लास से दिवाली पर्व मना रहा है, लेकिन सलाम है उन जवानों के जज्बे का जो सरहद की रक्षा से लेकर दहशतगर्दों और सीमा पार से रची साजिशों का मुकाबला करने को हर दम डटे हुए हैं। बात अगर नए जम्मू कश्मीर की हो तो यहां अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर नियंत्रण रेखा के अलावा भीतर की सुरक्षा में भारतीय सेना के जवान डटे हैं।

पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। लगातार सवा दो माह से आतंकियों की घुसपैठ के प्रयास से लेकर सीमा पार से गोलाबारी और भीतर आतंकी हमलों को भारतीय सेना जान की बाजी लगाकर हर कोशिश को नाकाम कर रही है। घरों से हजारों मील दूर सरहद की रक्षा करने वाले जवान कहते हैं कि जब हम यहां मुस्तैद हैं देश बेखौफ होकर खुशी के साथ दिवाली मनाए।

राजौरी के नौशहरा सेक्टर में एलओसी पर तैनात जवानों ने कहा कि हमारी दिवाली तो रोज बॉर्डर पर होती है। सीमा पार से आने वाले गोलाबारी का भी तो जवाब देना होता है। त्योहार में परिवार से दूर होने के बारे में कहा कि सभी जवान ही हमारा परिवार हैं। हम मोर्चे पर हों या बैरक में हर परिस्थिति में त्योहार मना ही लेते हैं। जम्मू संभाग के पुंछ और कश्मीर में उड़ी में पाक कई दिन से लगातार गोलाबारी कर रहा है। भारतीय सेना तो एलओसी पार किए बिना सीमा पार जवाबी कार्रवाई कर रही है।

पाक सैनिकों के बंकर से आतंकियों के लांचिंग पैड मिट्टी में मिलाए जा रहे हैं। वीर सैनिकों के परिवार के जज्बे व जुनून का कोई सानी नहीं है। त्योहारों में वे अपनों के साथ देश की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। सेवानिवृत्त सैनिक तरसेम कुमार ने कहा कि इस जम्मू कश्मीर की सुरक्षा के लिए सेना अपना बलिदान देने से पीछे नहीं हटी है। जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का दौर शुरू होने (1990 में) के बाद से 31 मार्च 2019 तक आतंकवाद का सामना करते हुए सुरक्षा बलों के 5,273 जवानों ने शहादत दी है। इस दिन हमें शहीद जवानों को भी भूलना नहीं चाहिए। 

Posted By: Rahul Sharma

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