क्या होता है 'पूर्ण राज्य का दर्जा'? लद्दाख में जिसके लिए सोनम वांगचुक करने जा रहे पदयात्रा, जानें इसके फायदे
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग फिर सुर्खियों में है, जिसके लिए सोनम वांगचुक 23-24 सितंबर को ...और पढ़ें
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HighLights
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग तेज
सोनम वांगचुक 23-24 सितंबर को पदयात्रा करेंगे
पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर लद्दाख को मिलेंगे अधिकार
डिजिटल डेस्क, जम्मू। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों के बीच बातचीत में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के बाद लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है।
9 सितंबर को गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ हुई बातचीत के बाद लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों ने बैठक में ठोस प्रगति नहीं होने पर निराशा जताई। इसके बाद सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो 23 और 24 सितंबर को पदयात्रा की जाएगी। हालांकि पहले ये यात्रा 6 दिवसीय थी लेकिन खराब मौसम की वजह से दिन कम कर दिए गए।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ‘पूर्ण राज्य का दर्जा’ होता क्या है और किसी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य बनने के बाद उसके अधिकारों में क्या बदलाव आता है? अगर आप भी ये जानना चाहते हैं और तो आज का आर्टिकल आपके लिए ही है।
क्या होता है पूर्ण राज्य का दर्जा?
पूर्ण राज्य का दर्जा का अर्थ होता है एक स्वतंत्र राज्य जो अपने अहम फैसले खुद ले सके। पूर्ण राज्य प्राप्त क्षेत्रों में विधानसभा होती है, मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद चुनने का अधिकार होता है।
Ladakh Padyatra March
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) September 17, 2026
Due to prevailing weather conditions with cold nights, we’re making it into a symbolic 20 Km march on 23rd Sept. followed by martyrs day event on 24th.
Inconvenience regretted, look forward to joining you & marching together… pic.twitter.com/iq8aRuwh5k
राज्य सरकार को केंद्र सरकार से अलग कानून बनाने का अधिकार होता है और नागरिकों पर जरूरी कर लगाने का अधिकार होता है। बता दें कि लद्दाख में अभी कोई विधानसभा नहीं है।
पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने पर लद्दाख को होंगे क्या फायदे?
आपने ये तो समझ लिया कि पूर्ण राज्य का दर्जा क्या होता है? अब ये भी जान लें कि अगर लद्दाख को ये दर्जा मिल जाता है तो उसके क्या फायदे होंगे?
लद्दाख को क्यों चाहिए पूर्ण राज्य का दर्जा?
लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों की प्रमुख मांगों में पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल हैं। LAB और KDA का कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अपनी भूमि, संस्कृति, संसाधनों और स्थानीय प्रशासन से जुड़े मामलों में अधिक संवैधानिक और राजनीतिक सुरक्षा मिलनी चाहिए।

क्यों हो रही है छठी अनुसूची की मांग?
पूर्ण राज्य के दर्जे के अलावा लद्दाख के संगठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा की भी मांग करते रहे हैं। छठी अनुसूची मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के कुछ आदिवासी क्षेत्रों में स्वायत्त जिला और क्षेत्रीय परिषदों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन और सांस्कृतिक हितों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था है।
लद्दाख के संगठनों का तर्क है कि ऐसी संवैधानिक सुरक्षा से क्षेत्र की भूमि, संस्कृति और स्थानीय पहचान को अधिक संरक्षण मिल सकता है।
पूर्ण राज्य बनने पर लद्दाख में क्या बदल सकता है?
सबसे अहम बदलाव निर्वाचित राज्य सरकार और विधानसभा का होना है। इसके साथ ही राज्य सरकार को संविधान के तहत राज्य सूची और लागू संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने की शक्तियां मिलती हैं।
केंद्र शासित प्रदेश और पूर्ण राज्य में क्या अंतर है?
भारत में राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UT) प्रशासनिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिहाज से अलग हैं। राज्य का शासन निर्वाचित राज्य सरकार के माध्यम से चलता है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक/उपराज्यपाल के जरिए होता है।
