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सोनम वांगचुक की पत्नी पहुंचीं हाईकोर्ट, लद्दाख में 1076 कनाल जमीन का मामला गरमाया; HIAL मामले में HC का अंतरिम आदेश

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:54 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की 1076 कनाल जमीन के विवाद में लद्दाख प्रशासन को अंतरिम आदेश दिया है।

एचआइएएल को आवंटित जमीन विवाद में हाई कोर्ट ने दिया अंतरिम आदेश। (फाइल फोटो)

एचआइएएल को आवंटित जमीन विवाद में हाई कोर्ट ने दिया अंतरिम आदेश। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने लद्दाख प्रशासन को अंतरिम आदेश दिया।

  2. विवादित जमीन पर तीसरे पक्ष का हित न बनाने का निर्देश।

  3. HIAL की 1076 कनाल जमीन आवंटन का मामला।

जागरण संवाददाता, जम्मू। हिमालयन इंस्टीट्यूट आफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (एचआइएएल) को आवंटित 1076 कनाल, एक मरला जमीन को लेकर चल रहे विवाद में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट ने लद्दाख प्रशासन को निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक विवादित जमीन पर किसी तीसरे पक्ष का हित या अधिकार सृजित न किया जाए।

हालांकि कोर्ट ने फिलहाल जमीन का आवंटन रद करने वाले प्रशासनिक आदेश पर रोक नहीं लगाई है। जस्टिस संजय धर ने एचआइएएल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। याचिका एचआइएएल की सह-संस्थापक और सीइओ गीतांजलि जे. आंगमो ने दायर की है, जो सोनम वांगचुक की पत्नी हैं।

क्या है मामला?

मामला लेह के फ्यांग थांग में स्थित 1076 कनाल एक मरला जमीन से जुड़ा है। प्रशासन ने 21 अगस्त 2025 को आदेश जारी कर इस जमीन का एचआइएएल को किया गया आवंटन रद कर दिया था। एचआइएएल ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए आवंटन बहाल करने और मूल आवंटन के अनुरूप लीज डीड जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।

याचिका के अनुसार, पांच मई 2018 को एचआइएएल को पहाड़ी क्षेत्रों के विकास के लिए वैकल्पिक विश्वविद्यालय स्थापित करने के उद्देश्य से 40 वर्ष की अवधि के लिए जमीन आवंटित की गई थी। इसमें खसरा नंबर 5357,5199 के तहत 545 कनाल आठ मरला और खसरा नंबर 5358 के तहत 530 कनाल 13 मरला जमीन शामिल थी।

आवंटन के 15 दिन में लीज के लिए किया आवेदन

एचआइएएल का दावा है कि आवंटन के 15 दिन के भीतर उसने लीज डीड के लिए आवेदन कर दिया था और इसके बाद जमीन पर आधारभूत ढांचे तथा शैक्षणिक गतिविधियों का विकास शुरू किया। संस्थान ने दावा किया कि लीज डीड में देरी प्रशासनिक स्तर पर रही। कोविड काल और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद नई लीज नीति तैयार होने के कारण प्रक्रिया लंबित रही।

जमीन आवंटन रद करने पर कोर्ट पहुंचा संस्थान

प्रशासन ने आवंटन रद करते हुए तर्क दिया था कि जमीन पर विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हुआ, लीज डीड निष्पादित नहीं हुई और औपचारिक रूप से जमीन का कब्जा सौंपने-लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।एचआइएएल की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि संस्थान को सुनवाई का अवसर दिए बिना आवंटन रद किया गया।

संस्थान ने ‘लेजिटिमेट एक्सपेक्टेशन’ का सिद्धांत भी उठाते हुए कहा कि प्रशासन के लगातार पत्राचार और आश्वासनों के आधार पर उसने जमीन पर निवेश और विकास कार्य किए।लद्दाख प्रशासन की ओर से डीएसजीआइ विशाल शर्मा और सीजीएससी ईशान दधीचि पेश हुए। कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को होगी। (जेएनएफ)