जागरण संवाददाता, जम्मू : हर वर्ष की तरह भैरव अष्टमी के मौके पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत रविवार को प्राचीन भैरव मंदिर अप्पर बाजार से वाइकर्स रैली निकाली जाएगी। रैली में भाग लेने वाले सैकड़ों वाहन चालक युवा इस रैली में भाग लेंगे और शहर के हर चौक में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की खुशहाली एवं शांति के लिए काल भैरव का गुणगान करेंगे।

महंत रूमिल शर्मा ने बताया कि कोई भी भैरव भगत इस रैली में भाग ले सकता है। इससे भैरव अष्टमी पर होने वाले कार्यक्रमों का संदेश एवं निमंत्रण दिया जाएगा। रैली से लोगों को भैरव जी के बारे में जानने की उत्सुकता भी बढे़गी। इसके अलावा शांति, भाईचारे और खुशहाली के लिए हर चौक में भैरव जी का गुणगान किया जाएगा। उनके विभन्न नामों का उच्चारण किया जाएगा। जो लोग रैली में भाग नहीं ले सकते वह अपने-अपने मोहल्लों के चौकों में वाइकर्स के साथ भैरव नाथ की पूजा अर्चना कर सकते हैं। पहला कार्यक्रम 10 नवबंर को प्रभात फेरी के साथ शुरू हुआ था। 19 नवंबर काे मंदिर में 52 बिरादरियों की मेल होगी। दोपहर 12 बजे भटुक पूजन होगा। 1.00 बजे जंगम पूजन होगा। 20 नवंबर को विशाल भंडारा होगा। जिसमें 70 के करीब स्टाल लगाए जाएंगे। बच्चों के मनोरंजन की विशेष व्यवस्था की गई है।

प्रचाीन भैरव मंदिर का इतिहास एवं मान्यता

मंदिरों के शहर जम्मू में प्राचीन भैरव मंदिर अप्पर बाजार चौक चबूतरा, जम्मू का वर्षो पुराना इतिहास है। हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक, पौराणिक एवं प्राकृतिक मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती ही जा रही है। श्रद्धालुओं का मानना है कि उन्होंने भगवान भैरव से जो मांगा उन्हें मिला है। दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। भगवान भोले नाथ के पांचवें अंशावतार भगवान भटुक भैरव नाथ जी के मंदिर का निर्माण किस प्रकार हुआ। उसके पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। महंत रूमिल शर्मा ने बताया कि शहर के बुजुर्गो अनुसार करीब दो सौ वर्ष पूर्व महाराजा गुलाब सिंह ने अपने महलों के निर्माण कार्यो से पूर्व महलों के पास स्थित बाबा भैरव जी की पूजा अर्चना कर महल निर्माण कार्य आरंभ करवाया अत: बिना किसी बाधा के महलों का निर्माण कार्य सम्पूर्ण हुआ।

मंदिर स्थल के नजदीक भवन निर्माण का काम चल रहा था और भगवान भैरव नाथ की पिंडी के निकट मलबे का ढेर लगाया गया था। उस समय मंदिर नहीं था केवल खुले मैदान में भगवान भैरव नाथ जी की शिला मात्र थी। कार्य कर रहे मजदूरों ने मलबे के साथ पिंडी को भी उठाकर रानी पार्क तालाब के किनारे फैंक दिया। बेशक मजदूरों द्वारा की गई यह गलती अज्ञानता वश हुई थी, उसी रात निर्माण कार्य करवा रहे भवन निर्माता के स्वप्न में भैरव नाथ जी ने दर्शन दिये और कहा कि मेरी पिंडी को मलबे के ढेर से निकाल कर उसी स्थान पर पुन: स्थापित किया जाए। अगले दिन सुबह ही देरी किए बिना रानी पार्क में मलबे में पड़ी पिंडी को उठाया और पुन: उसी स्थान पर स्थापित करने के साथ-साथ मंदिर का निर्माण भी करवाया ताकि भविष्य में पुन: कोई ऐसी गलती न दोहराए। इस तरह बाबा भटुक भैरव नाथ जी के मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर की मान्यता दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर के साथ जुटते जा रहे हैं।

मंदिर के महंत रूमिल शर्मा ने बताया कि मंदिर का कामकाज विभिन्न भागों में बांटा हुआ है। अलग-अलग कमेटियों का गठन किया हुआ है। मंदिर में हर दिन धार्मिक अनुष्ठान होता है। हर रविवार भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त हर महीने आले कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस अष्टमी को भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। अक्षय तृतीय को भी भंडारे का आयोजन किया जाता है।

भैरव अष्टमी पर होता है महोत्सव जैसा माहौल

भैरव अष्टमी वाले दिन इस मंदिर में उत्सव जैसा माहौल होता है। पूरे बाजार को सजाया गया होता है। पूरे बाजार में विभन्न पंडाल लगाए गए होते हैं। तरह-तरह के व्यंजनों के लंगर लगाए जाते हैं। हजारों की संख्या में लोग भैरव अष्टमी वाले दिन लगने वालें भंडारों से प्रसाद ग्रहण करते हैं। पंडित रूमिल शर्मा ने बताया कि भगवान भैरव नाथ के रुद्र अवतार के बारे में लोगों को अधिक से अधिक जानकारी मिले, इसके लिए मंदिर में निरंतर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिस प्रकार भगवान गणेश जी की पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता। उसी तरह भगवान भगवान शिव की पूजा भी भगवान भैरव नाथ जी की पूजा भगवान शंकर के समान की जाती है। पंडित रुमिल शर्मा ने बताया कि भैरव नाथ जी भगवान श्री अनुमान जी के मित्र हैं, भगवान शनि के गुरु हैं और केतु इनकी सवारी है। पूरे बाजार में भैरव जी के भजन गूंज रहे होते हैं। श्रद्धालु बैंड बाजों पर झूमते, नाचते, गाते हैं।

प्राचीन भैरव मंदिर में लगती है 52 बिरादरियों की मेल

भगवान भैरव कई बिरादरियों के कुलदेवता हैं। करीब 52 बिरादरियों की मेल भगवान भैरव मंदिर में लगती है। जिनमें सूदन, सासन, दत्त, आनंद, खुखरान सहित अन्य शामिल हैं। अधिकतर बिरादरियां ऐसी हैं, जिनका भारत पाक बटवारे के दौरान विस्थापन हुआ। इनमें से अधिकत ने सर्वसम्मति से भैरव मंदिर में अपनी मेल का आयोजन शुरू किया और अब हजारों की संख्या में लोग इन मेलों में भाग ले कर अपने कुल देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Posted By: Rahul Sharma

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