जम्मू, नवीन नवाज। नगरोटा मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों का बड़ा मिशन था। वे जैश-ए-मुहम्मद के अफजल गुरु स्कवायड के सदस्य थे। इन्हें कश्मीर में नौ फरवरी को अफजल गुरु की बरसी और 14 फरवरी पुलवामा हमले की बरसी पर बड़े हमला करने और जैश की कमान संभालने को कहा था।

सूत्रों के मुताबिक घाटी में इस समय जैश के 70 आतंकी सक्रिय हैं जिनमें लगभग 50 पाकिस्तानी हैं। नगरोटा में जिस ट्रक में आतंकी आए थे उसके चालक समीर और उसके साथी आसिफ और आसिफ अहमद से जारी पूछताछ के आधार पर सूत्रों ने बताया कि मारे गए तीनों आतंकियों को दक्षिण कश्मीर में जैश की कमान संभालना था। गत सप्ताह जैश के तीन नामी कमांडर कारी यासिर, अबू सैफुल्ला और मूसा जिला पुलवामा के अंतर्गत खिरयु और अवंतीपोर में मारे गए हैं।

इन आतंकियों की मौत से जैश की गणतंत्र दिवस पर कश्मीर में बड़े पैमाने पर विध्वंसकारी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश नाकाम हो गई थी। बीती रात पाक से जैश के तीन कमांडर अंतरराष्ट्रीय सीमा (आइबी) पार कर जम्मू संभाग के सीमावर्ती इलाके में दाखिल हुए थे। ये आतंकी जम्मू-पठानकोट हाईवे पर एक जगह विशेष पर पहुंच थे, जहां से इन्हें ट्रक में बैठाया गया था।

जम्मू कश्मीर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह के मुताबिक तीनों आतंकी कठुआ में हीरानगर सेक्टर के अंतर्गत दियालाचक में तड़के ट्रक में सवार हुए थे। सूत्रों ने बताया कि ट्रक चालक समीर से हुई पूछताछ और ट्रक की तलाशी के दौरान मिली सरोर टोल प्लाजा की पर्ची से पता चलता है कि ट्रक तड़के करीब ढाई बजे जम्मू से कठुआ की तरफ निकला था।

इसके बाद सवा घंटे बाद ट्रक ने सांबा-विजयपुर की तरफ से जम्मू के लिए टोल प्लाजा को पार किया था।सूत्रों ने बताया कि बन टोल प्लाजा के पास मारे गए आतंकी अगर कश्मीर में पहुंच जाते तो नौ फरवरी को संसद हमले के साजिशकर्ता अफजल गुरु की बरसी और उसके बाद पुलवामा हमले की बरसी पर 14 फरवरी को सुरक्षाबलों के शिविरों पर आत्मघाती हमले की साजिश को अंजाम दे सकते थे। इन्हें इसी मकसद से पाकिस्तान स्थित जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर के निर्देशानुसार उसके भाई रौऊफ ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के सहयोग से लांच किया था। इनके पास से बरामद हथियार भी साबित करते हैं कि इन आतंकियों को सामान्य श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

यह अजहर मसूद द्वारा अफजल गुरु के नाम पर बनाए गए आत्मघाती दस्ते अफजल गुरु स्कवायड जिसे गुरु ब्रिगेड भी कहते हैं, के सदस्य हो सकते हैं। कारी यासिर, सैफुल्ला और मूसा की मौत के बाद कश्मीर में सक्रिय जैश कैडर का मनोबल गिरा हुआ है, उसे संभालने और गुरु व पुलवामा कांड की बरसी पर हमले की साजिश को अंजाम देना इनका मुख्य मकसद बताया जा रहा है। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि मारे गए तीनों आतकी पाकिस्तानी थे। हथियारों की जो खेप मिली है, वह बताती है कि यह खतरनाक मकसद के साथ आए हुए थे। मारे गए आतंकियों के पकड़े गए साथियों से पूछताछ जारी है। 

Posted By: Preeti jha

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