लद्दाख में सेना की ताकत बढ़ा रही नीमो-पदम दारचा सड़क, चीन-पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब; लद्दाख से जोड़ता है यह मार्ग
लद्दाख में बनी नीमो-पदम-दारचा सड़क भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत बढ़ा रही है, जिससे चीन और पाकिस्तान के सामने त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
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लद्दाख में भारतीय सेना के जवान। फाइल फोटो
HighLights
लद्दाख में सेना की रणनीतिक ताकत बढ़ा रही नीमो-पदम-दारचा सड़क।
हिमाचल प्रदेश से लद्दाख को जोड़ती है, त्वरित आवाजाही संभव।
सेना के लिए सुरक्षित और कम दूरी का विकल्प प्रदान करती है।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बनी नीमो-पदम-दारचा सड़क नियंत्रण रेखा पर चीन के सामने तैनात भारतीय सेना की ताकत बढ़ा रही है। लद्दाख को हिमाचल प्रदेश से सीधे जोड़ने वाली नीमो-पदम-दारचा सड़क चीन व पाकिस्तान का सामना करने की रणनीतिक तैयारियों के लिहाज से बहुत अहम है।
त्वरित कार्रवाई करने के लिए भारतीय सेना के जवान हिमाचल के दारचा के रास्ते पदम व फिर नीमो होते हुए कुछ ही घंटों में लेह या कारगिल तक पहुंच जाएंगे। इस महत्वकांक्षी 298 किलोमीटर के सड़क प्रोजेक्ट की निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद की है।
नीमो-पदम दारचा सड़क 16500 फीट की ऊंचाई पर हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी के दारचा को कारगिल जिले के जंस्कार व पदम इलाके को जोड़ती है। दारचा से पदम की दूरी करीब 148 किलोमीटर है। पदम के बाद यह सड़क नीमो के रास्ते लेह मार्ग से जुड़ रही है।
सेना को जल्द कारगिल व लेह तक पहुंचने के लिए बेहतर विकल्प
इस सड़क के बनने से सेना का साजो सामान कारगिल व लेह तक पहुंचाना आसान हो गया है। पहले जंस्कार जाने के लिए तीन गुना अधिक सफर करना पड़ता था। सड़क बनने से हिमाचल प्रदेश के रास्ते सेना को जल्द कारगिल व लेह तक पहुंचने के लिए एक बेहतर विकल्प मिल गया है।
इस सड़क से मनाली से पदम की दूरी 600 किमी कम हो जाएगी पहले मनाली से लेह के पदम पहुंचने का सफर करीब 900 किलोमीटर था। सड़क सेना के लिए भी अधिक सुरक्षित है। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने हाईवे को निशाना बनाकर भारतीय सेना के लिए मुश्किलें पैदा की थीं।
सेना को बना सकता था निशाना
कारगिल में ऊंचाई पर बैठा दुश्मन आसानी से हाईवे पर सेना की मूवमेंट को देखने के साथ उसे निशाना बना सकता था। इसलिए सेना इस क्षेत्र में एक सुरक्षित सड़क की जरूरत महसूस कर रही थी। इसके बाद सेना ने लेह और कारगिल तक पहुंचने के लिए अन्य सड़कों के विकल्प तलाशना शुरू किए। इसके फलस्वरूप दारचा-पदम-नीमो सड़क सामने आई।
