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जम्मू में शाम होते ही सजता है 'बीमारियों का बाजार', न साफ तेल की गारंटी-ना स्वच्छता की; जांच के नाम पर खानापूर्ति

Published: Wed, 04 Nov 2026 12:41 PM (IST)

जम्मू में शाम होते ही बिना किसी जांच और मानक के धड़ल्ले से स्ट्रीट फूड बेचा जा रहा है, जिससे ...और पढ़ें

जम्मू में बिना मानक व जांच धड़ल्ले से बिक रहा स्ट्रीट फूड। (फाइल फोटो)

जम्मू में बिना मानक व जांच धड़ल्ले से बिक रहा स्ट्रीट फूड। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शाम को स्ट्रीट फूड पर नहीं होती कोई जांच।

  2. मिलावटी सामग्री और दूषित तेल का धड़ल्ले से उपयोग।

  3. खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह नदारद।

जागरण संवाददाता, जम्मू। शहर में सूरज ढलते ही प्रमुख चौराहों और बाजारों में स्ट्रीट फूड की रेहड़ियां सज जाती हैं, लेकिन इनके साथ ही लोगों की सेहत से खिलवाड़ का खुला खेल भी शुरू हो जाता है। बिना किसी खाद्य सुरक्षा जांच और मानकों की अनदेखी कर बेखौफ मिलावटी व दूषित खाद्य सामग्री बेची जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जब शहर में इन रेहड़ियों पर ग्राहकों की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है, ठीक उसी समय खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह नदारद रहती है।

गांधीनगर, बाहुप्लाजा, सतवारी, डिग्याना, गंग्याल, त्रिकुटा नगर, नानक नगर, कच्ची छावनी, परेड, पुरानी मंडी, तालाब तिल्लो, जानीपुर, रूपनगर समेत लगभग सारे शहर में शाम 6 बजे के बाद चाट, मोमोज, चाप, गोलगप्पे, फ्राइड आइटम्स, फिश-चिकन की दर्जनों रेहड़ियां लग जाती हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकांश विक्रेता घटिया किस्म के मसालों, बार-बार इस्तेमाल किए गए काले पड़ चुके तेल और सिंथेटिक रंगों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। हद तो यह है कि अब तो रेहड़ियों को बंद करने का टाइम-टेबल भी नहीं रहा। पहले पौने दस बजे रेहड़ियां बंद करवाने की प्रक्रिया शुरू होती थी। आजकल 11 बजे तक भी कई रेहड़ियां चल रही होती हैं।

दफ्तर बंद होते ही खत्म हो जाती है जवाबदेही

विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि अधिकारियों और जांच टीमों की सक्रियता सिर्फ सरकारी दफ्तर के कामकाजी घंटों तक ही सीमित रहती है। शाम को जब स्ट्रीट फूड का बाजार चरम पर होता है, तब कोई भी टीम औचक निरीक्षण के लिए सड़कों पर नहीं दिखाई देती।

कभी-कभार त्योहारों या विशेष अभियानों के नाम पर की जाने वाली खानापूर्ति के अलावा कोई ठोस और नियमित कार्रवाई जमीन पर नजर नहीं आती।

सख्त कार्रवाई की मांग

आम नागरिक राजेश गुप्ता कहते हैं कि शाम होते ही हर नुक्कड़ पर फास्ट फूड की रेहड़ियां लग जाती हैं। तलने के लिए जिस तेल का उपयोग होता है, वह कई-कई दिनों तक नहीं बदला जाता। बच्चे इसे बड़े चाव से खाते हैं और फिर बीमार पड़ते हैं। प्रशासन सिर्फ दिन में औपचारिकता निभाता है जबकि असली जांच तो शाम 7 से 10 बजे के बीच होनी चाहिए।


स्कालर नीरज कुमार कहते हैं कि रेहड़ी-पटरी वालों के पास न तो हाइजीन के कोई साधन हैं और न ही साफ पानी की व्यवस्था। अधिकांश विक्रेताओं के पास फूड सेफ्टी का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। सस्ते सामान और खुले मसालों में सीधे तौर पर मिलावट हो रही है, जिससे फूड पाइजनिंग और पेट के गंभीर संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।

 डिप्टी कमिश्नर फूड, जम्मू रफी अहमद डार कहते हैं कि विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर नमूने एकत्र करता है। शाम के समय भी विशेष फ्लाइंग स्क्वाड के जरिए औचक निरीक्षण की योजना बनाई जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वाले और अमानक तेल व सामग्री का इस्तेमाल करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स पर सख्त जुर्माना और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
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