'अगर पैसे बांटकर अपने लोग चुनवाना चाहते हैं...', लद्दाख में पहली बार होने जा रहे पंचायत चुनाव पर क्या बोले सोनम वांगचुक?
लद्दाख में 21 नवंबर को पहले पंचायत चुनावों की घोषणा हुई है, जो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली ...और पढ़ें

शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक (फाइल फोटो)
HighLights
लद्दाख में 21 नवंबर को पहले पंचायत चुनाव की घोषणा हुई
पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए
पैसे बांटकर प्रतिनिधि चुनने की प्रथा पर सोनम वांगचुक ने आपत्ति जताई
डिजिटल डेस्क, जम्मू। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में पंचातय चुनाव का एलान हो चुका है। बुधवार को लद्दाख राज्य चुनाव आयोग ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सभी ग्राम पंचायतों के लिए चुनाव की घोषणा की। चुनाव 21 नवंबर को होंगे।
खास बात है कि 2019 में लद्दाख के एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बना था, जिसके सात साल बाद अब पहली बार यह चुनाव होने जा रहे हैं।
औपचारिक अधिसूचना अगले सप्ताह जारी की जाएगी और नतीजों की घोषणा सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया 30 नवंबर से पहले पूरी कर ली जाएगी। नवंबर में होने जा रहे पंचायत चुनाव को लेकर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया भी आई है।
क्या बोले सोनम वांगचुक?
जब उनसे पूछा गया कि लद्दाख के लोग चुनाव का बहिष्कार करेंगे या चुनाव का समर्थन तो सोनम वांगचुक ने कहा कि हम जनता पर कुछ भी थोपना नहीं चाहेंगे। अगर लोगों को अब भी लगता है कि देश में लोकतंत्र बचा हुआ है, तो वे चुनाव जरूर करवाएं।
लेकिन अगर उनका तरीका यही है कि पैसे बांटकर अपने मनपसंद लोगों को चुनाव जितवाया जाए, फिर उसी तर्ज पर काउंसिल के चुनाव हों, और उसके बाद विधानसभा चुनावों में भी ऐसे ही लोगों को जिताकर उन्हें 'जनप्रतिनिधि' कहा जाए, तो फिर हम जैसे लोगों (लद्दाख के लोगों) का होना ही अप्रासंगिक हो जाएगा।
पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने कहा कि ऐसा करने पर पसंदीदा जन प्रतिनिधियों को चुनवा लाएंगे और उनके फैसलों को आधिकारिक मान्यता दे दी जाएगी, क्योंकि कागजों पर तो वही 'जनप्रतिनिधि' कहलाएंगे। जबकि सच्चाई यह है कि हम सभी जानते हैं कि आज भारत में जनप्रतिनिधि किस तरह चुने जा रहे हैं और इसी गिरते स्तर के खिलाफ तो आज पूरा देश आंदोलित है।
चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख आज ऐसे हालात का सबसे बड़ा और गंभीर उदाहरण बन चुका है। यहां न तो चुनाव होते हैं और न ही लोगों के पास उनके अधिकार हैं और जहां चुनाव हुए भी, वहा जनता से किए गए वादे पूरी तरह तोड़ दिए गए।
सोनम वांगचक ने कहा कि मेरी साफ राय है कि केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार पर्याप्त नहीं है। बल्कि राजनीतिक दलों द्वारा जो चुनावी वादे लिखकर दिए जाते हैं, उन्हें पूरा करना भी अनिवार्य होना चाहिए। अगर चुनावी वादों का कोई मोल ही नहीं रह जाता तो फिर ऐसे चुनावों का भी कोई मतलब नहीं बचता।
