सोनम वांगचुक ने लद्दाख प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग; स्टिंग ऑपरेशन का दिया हवाला
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख प्रशासन के साथ जारी टकराव पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की अपील की ...और पढ़ें
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सोनम वांगचुक। फाइल फोटो
HighLights
वांगचुक ने राष्ट्रपति मुर्मू से लद्दाख मामले में हस्तक्षेप मांगा।
प्रशासन पर दुष्प्रचार अभियान चलाने और उत्पीड़न का आरोप।
लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश का दावा।
संवाद सहयोगी, लेह। लद्दाख में प्रशासन के साथ जारी टकराव के बीच जलवायु कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने उपराज्यपाल प्रशासन पर अपने और अन्य आलोचकों के खिलाफ सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया।
शनिवार को जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने एक कथित स्टिंग ऑपरेशन के अंश साझा किए। उन्होंने दावा किया कि 'लद्दाख लेंस' और 'लद्दाख विजन' नामक दो इंटरनेट मीडिया पेजों के जरिये उन्हें निशाना बनाया गया और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना का प्रचार किया गया।
उपराज्यपाल कार्यालय से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया
वांगचुक के अनुसार, ये पेज 14 अक्टूबर को सामने आए थे, जबकि एक दिन पहले सक्सेना ने मुंबई में एक मीडिया संस्थान के समारोह में उनके बारे में टिप्पणी की थी। उनके वकीलों की जांच में एक प्रचार एजेंसी और उपराज्यपाल कार्यालय के बीच संभावित संबंधों का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर उपराज्यपाल कार्यालय की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
वांगचुक ने अपने संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट आफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (एचआइएल ) के खिलाफ कार्रवाई को भी प्रशासनिक उत्पीड़न बताया। अगस्त 2025 में संस्थान की जमीन का पट्टा रद्द कर दिया गया था। प्रशासन ने निर्धारित समय में पट्टा समझौता और प्रीमियम जमा नहीं करने तथा जमीन के तय उपयोग की शर्तों के उल्लंघन को इसकी वजह बताया था।
लेह की अदालत ने सुरक्षित रखा फैसला
वांगचुक और उनकी पत्नी गितांजलि जे. आंगमो ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। वहीं, संस्थान की पूर्व कर्मचारी को मातृत्व लाभ नहीं देने और अनुचित व्यवहार से जुड़े मामले में शनिवार को लेह की श्रम अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया।
राष्ट्रपति को भेजे पत्र में वांगचुक ने लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने भूमि, उद्योग, बिजली और पर्यटन नीतियों को स्थानीय हितों के प्रतिकूल बताते हुए शराब दुकानों के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाणपत्रों की संख्या 16 से घटाकर छह किए जाने पर भी सवाल उठाए।
वांगचुक ने राष्ट्रपति से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश सहित सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के लिए समान अधिकार, लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।