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'दुख पहुंचाने का इरादा नहीं था...', लद्दाख की तिब्बत से तुलना पर घिरे सोनम वांगचुक ने मांगी माफी

Published: Sat, 26 Sep 2026 02:34 PM (IST)

सोनम वांगचुक ने लद्दाख की स्थिति की चीन के कब्जे वाले तिब्बत से तुलना करने पर हुए विवाद के बाद ...और पढ़ें

पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक (फाइल फोटो)

पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक (फाइल फोटो)

HighLights

  1. सोनम वांगचुक ने लद्दाख-तिब्बत तुलना पर विवाद के बाद माफी मांगी

  2. उन्होंने लेह हिंसा की भयावहता को उजागर करने का प्रयास किया था

  3. वांगचुक ने कहा, उनका इरादा तिब्बती दोस्तों को दुख पहुंचाना नहीं था

डिजिटल डेस्क, जम्मू। चीन के कब्जे वाले तिब्बत के हालात को लद्दाख से बेहतर बनाने पर सोनम वांगचुक विवादों में घिर गए। इस पर शनिवार को शिक्षाविद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफार्म पर लेह हिंसा का जिक्र करते हुए लिखा कि कुछ लोगों ने मुझसे पूछा है कि क्या पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई बेरहम हत्याओं की तुलना तिब्बत में चीन के दमन से करना सही है! मैं उन्हें दोष नहीं देता क्योंकि उन्हें पता है कि उस दिन लेह में क्या हुआ था, क्योंकि कई हफ्तों तक इंटरनेट पूरी तरह बंद रहा था।

सोनम वांगचुक ने कहा कि मैं तिब्बती दोस्तों के दुख-दर्द को समझता हूं और हमेशा चीन के दमन का विरोध करता रहा हूं, लेकिन अगर आपने देखा होता कि उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन लेह के लोगों ने क्या झेला, तो शायद आप असहमत न होते। हालांकि, लद्दाख भारत में हमेशा खुशहाल रहा है, लेकिन पिछला साल तो सबसे बुरा था।

चार लोगों की बेरहमी से मौत: सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक ने लेह हिंसा को जोड़ते हुए लिखा कि 20000 लोगों के एक छोटे से शहर में चार लोगों की बेरहमी से हत्या हुई, एक ने आत्महत्या की, 80 घायल हुए, और 75 लोगों को हत्या की कोशिश जैसे आरोपों में अरेस्ट किया गया। और यह सब बिना किसी फायरिंग ऑर्डर के किया गया, जिसे एक सुनियोजित हिंसा माना जाता है।

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पर्यावरणविद ने दिल्ली प्रोटेस्ट का जिक्र करते हुए लिखा कि जंतर-मंतर पर पैलेट गन और लाठीचार्ज के इस्तेमाल के कारण अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की कार्यवाही ठप हो गई थी। क्या उन्हें इसके लिए इस्तीफा नहीं देना चाहिए? आप शांतिपूर्ण भूख हड़ताल पर बैठे लोगों पर पुलिस की बर्बरता का यह क्लिप देख सकते हैं। बाकी फैसला मैं दर्शकों पर छोड़ता हूं।

मैं देख रहा हूं कि हमारे कई तिब्बती दोस्त इस तुलना से परेशान हैं। सबसे पहले, मैं सिर्फ एक खास दिन की एक खास घटना की तुलना कर रहा था, न कि उन दशकों की तकलीफों की जिनसे तिब्बती लोग गुजरे हैं। दूसरी बात, मेरा किसी को भी दुख पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था, खासकर अपने प्यारे तिब्बती दोस्तों को। मैं बस यह दिखाना चाहता था कि उस खास दिन लेह-लद्दाख ने कितनी मुश्किल स्थिति का सामना किया... और अगर इससे किसी को दुख पहुंचा है, तो मैं दिल से माफी मांगता हूं। -सोनम वांगचुक, पर्यावरणविद और शिक्षाविद

सोनम वांगुचक ने क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने गुरुवार को लेह में अपने भाषण में कहा था कि लेह हिंसा के दौरान पुलिस का गलत इस्तेमाल किया गया था। वांगचुक ने कहा था कि जब लद्दाख के सामने भारत व चीन के विकल्प थे, तब भारत को इसलिए चुना गया था, क्योंकि यहां लोकतांत्रिक व्यवस्था व नागरिकों को गरिमा के साथ रहने का अधिकार मिलने की उम्मीद थी। आज लद्दाख का माहौल चिंता का विषय है।

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