जम्मू, विकास अबरोल। शुभांगी बख्शी के प्रयास से गरीब बच्चों में पढ़ने की ललक जाग उठी है। उनमें शिक्षा की लौ जलाने के लिए शुभांगी ने तो लिए गूगल के लिए काम करने वाली मल्टीनेशनल ग्लोबल लाजिक कंपनी की नौकरी तक छोड़ दी। वह पिछले 10 वर्षों से गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।

वर्ष 2009 में आइटी से इंजीनियरिंग की डिग्री करने के उपरांत शुभांगी भी अपने स्वर्णिम और उज्ज्वल की चाह में गुरुग्राम स्थित मल्टीनेशनल कंपनी रुफ्त इंटरनेशनल जिसे ग्लोबल लॉजिक के नाम से जाना जाता है, में डॉटा एनालिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया। करीब छह महीनों के उपरांत वह छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए जब जम्मू लौटीं तो देखा किया कि उनकी मां नीरा बख्शी कई वर्षों से बच्चों को घर में ट्यूशन देती हैं, के पास झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले कुछ श्रमिक अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके पास आए। वे अपने बच्चों के भविष्य को स्वर्णिम बनाना चाहते हैं। वे नहीं चाहते हैं बड़े होकर बच्चे उनकी तरह दिहाड़ी लगाएं। यह सब देखकर उनकी आंखें भर आई और उन्होंने तभी यह तय कर लिया कि अब वह नौकरी पर नहीं लौटेंगी। उन्होंने मां और पिता एडवोकेट शाम शर्मा से भी इस बारे बात की। पहले तो उन्होंने उसे ऐसा करने से साफतौर पर मना कर दिया, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि इस नेक कार्य से बढ़कर कोई कार्य नहीं है तो तभी से उन्होंने गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देना शुरू कर दी।

रोजाना तीन घंटे की कक्षा, अब मां भी बंटाती है पढ़ाने में हाथ

रिहाड़ी कॉलोनी की रहने वाली शुभांगी ने बताया कि उनके पास सातवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थी आते हैं। चूंकि उनका पसंदीदा विषय विज्ञान और गणित है। हर बार पहले से अधिक संख्या में विद्यार्थी पढ़ने आ जाते हैं। गत वर्ष 10वीं की परीक्षा में दो बच्चों ने आठवीं और नवमीं पोजीशन भी हासिल की है। सुबह पायथन प्रोग्रामिंग कोर्स करने के उपरांत हर रोज शाम चार बजे से सात बजे तक तीन घंटे बच्चों को शिक्षा देती हैं। उन्होंने इसके लिए घर में ही बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। इस काम में तो अब उनकी मां भी काफी हाथ बंटाती हैं। अभी तक 200 के करीब बच्चों में शिक्षा की लौ जला चुकी हैं।

शिक्षा पर सबका अधिकार

शुभांगी ने बताया कि मध्यवर्गीय परिवार से शिक्षा हासिल करने के लिए आने वाले बच्चों से नाममात्र फीस लेती हैं। गरीब बच्चों से तो फीस लेना तो दूर कॉपी-किताबों का खर्च भी स्वयं से वहन करती हैं। शिक्षा हासिल करने का अधिकार केवल मध्य वर्गीय और अमीर परिवारों के बच्चों को नहीं बल्कि झुग्गी झोंपड़ियों में रहने वाले बच्चे भी शिक्षा हासिल करने के उतने ही हकदार हैं।

 

Posted By: Rahul Sharma

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