जागरण संवाददाता, जम्मू : दो बार साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित स्व. छत्रपाल के कृतित्व पर डोगरी संस्था की ओर से एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में छत्रपाल के कृतित्व के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के दौरान उन्हें ऐसा साहित्यकार बताया गया जिन्होंने पूरा जीवन ही साहित्य और समाज सेवा को समर्पित किया हुआ था।

संगोष्ठी में तीन पेपर पढ़े गए। कथा साहित्य और व्यंग्य साहित्य को छत्रपाल का योगदान विषय पर डॉ. निर्मल विनोद ने पेपर पढ़ा। प्रीतम कटोच ने मीडिया में छत्रपाल के योगदान पर पेपर पढ़ा। डॉ. बंसीलाल द्वारा डोगरी में अनूदित साहित्य को छत्रपाल का योगदान विषय पर पेपर पढ़ा। सभी पेपरों में पत्र-पत्रिकाओं के लेखकों ने साहित्य, प्रसारण, रेडियो और टेलीविजन नाटकों, धारावाहिकों और वृत्तचित्रों के क्षेत्र में छत्रपाल की महान उपलब्धियों की प्रमुख विशेषताएं सामने लाईं।

निदेशक, राज्य वन अनुसंधान संस्थान आइएफएस ओम विद्यार्थी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। प्रो. ललित मगोत्रा ने कार्यवाही की अध्यक्षता की। संचालन संस्थान की उपाध्यक्ष और जम्मू विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग की पूर्व प्रमुख प्रो. वीना गुप्ता ने किया। उन्होंने अपनी सुविचारित और समयबद्ध टिप्पणियों सहित मंच संचालन किया।

ओम विद्यार्थी ने कहा कि छत्रपाल एक बहुआयामी व्यक्तित्व थे और उनकी रचनात्मकता में साहित्य की विभिन्न विधाओं में अभिव्यक्ति मिली। उन्होंने जो कुछ भी लिखा, उसने एक मानदंड स्थापित किया। न केवल साहित्य में बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उन्होंने अनुकरणीय कार्य किया। विकलांग बच्चों के लिए उन्होंने जीवन भर समर्पण भाव से कार्य किया। विद्यार्थी ने कई शैक्षणिक और साहित्यिक उपक्रमों में छत्रपाल के साथ अपने करीबी संबंध को उजागर करते हुए दर्शकों के साथ कई किस्से भी साझा किए।

प्रो. ललित मगोत्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्हें पूरी तरह साहित्य को समर्पित व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि वह डोगरी के उन महान साहित्यकारों में से एक थे, जिन्होंने साहित्य की विभन्न शैलियों में लिखते हुए देश के स्थापित साहित्यकारों में नाम स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उनके असामयिक प्रस्थान से डोगरी साहित्य को विशेष रूप से और सामान्य रूप से साहित्य को बहुत नुकसान हुआ। उन्होंने कहा छत्रपाल ने साहित्य और मीडिया की लगभग सभी शैलियों में अपनी रचनात्मक प्रतिभा की गहरी छाप छोड़ी। नौ पुस्तकें, 46 टेली धारावाहिक, 1100 टेलीविजन वृत्तचित्र और 115 टेलीफिल्म्स लिखी। यह अपने आप में एक उपलब्धि है। मगोत्रा ने यह भी कहा कि वह एक दुर्लभ प्रतिभा थे और उन्हें हमेशा डोगरी साहित्य के दिग्गजों में गिना जाएगा। डोगरी संस्था के उपाध्यक्ष ज्ञानेश्वर शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया।

Posted By: Jagran

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