जागरण संवाददाता, जम्मू : शारदा पीठ मंदिर एक पवित्र तीर्थ स्थान है। यह धार्मिक स्थल सभी वर्गो के लिए आस्था का केंद्र है। धार्मिक स्थल के प्रति हजारों लोगों की आस्था को देखते हुए यह प्रयास किए जा रहे हैं कि यह यात्रा लाखों भक्तों के विश्वास और उनके सम्मान के लिए फिर से शुरू की जाए। यात्रा के पुनरुद्धार के मुद्दे को एनडीए सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसमें कई पहलुओं को शामिल किया गया है क्योंकि यह कई मंत्रालयों और एजेंसियों से जुड़ा है। इसके लिए एक उपयुक्त तरीका खोजा जाएगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र ¨सह ने रविवार को दिल्ली में पिक्टोरियल बुक-सह-कैलेंडर का लोकार्पण करते हुए यह बात कही। इस मौके पर रवीन्द्र पंडिता की अध्यक्षता में शारदा कमेटी कश्मीर सेव और कश्मीरी पंडित समुदाय के कई प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। ¨सह ने बताया कि पाकिस्तान में शारदा पीठ या शारदा मंदिर पर कब्जा कर लिया गया। माना जाता है कि शारदा की बोली, जिसे शारदा लिपी भी कहा जाता है, देवनागरी ¨हदी लिपि खत्म होने से पहले लंबे समय से ब्राह्मण विद्वानों की मौलिक बोली रही है। ऐतिहासिक संदर्भ इंगित करते हैं कि मंदिर के पास एक बौद्ध विश्वविद्यालय हुआ करता था, जिसे सम्राट अशोक ने बनाया था।

उन्होंने बताया कि आजादी से पहले शारदा मंदिर की वार्षिक यात्रा हर साल नियमित रूप से आयोजित की जाती थी। यह परंपरा सदियों तक जारी रही। धार्मिक विश्वास के अनुसार यात्रा अगस्त के दौरान शुरू होती थी। शारदा कमेटी कश्मीर सेव के अध्यक्ष रवीन्द्र पंडिता ने बताया कि यात्रा को फिर से शुरू करने के लिए उन्होंने अभियान जारी रखा हुआ है। शारदा कमेटी कश्मीर बचाएं भी अभियान चला रहा है। वर्ष 1947 में विभाजन के बाद अचानक यात्रा में बाधा डाल दी गई और श्रद्धालुओं को वहां नहीं जाने दिया गया। पंडिता ने कहा कि डॉ. जितेंद्र ¨सह के समर्थन और विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के संरक्षण के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि वह मुजफ्फराबाद के स्थानीय नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने भी शारदा पीठ यात्रा की बहाली के लिए कश्मीरी ¨हदुओं की मांग को अपना समर्थन दिया है।

Posted By: Jagran

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