श्रीनगर, नवीन नवाज। पर्यटकों के लिए एडवाइजरी हटने की घोषणा से कश्मीर में मरनासन्न नजर आ रहे पर्यटन उद्योग में नया जोश आ गया है। राज्य की अर्थव्यसवस्था में पर्यटन जगत की अहमियत है। होटल मालिक, टैक्सी चालक, दस्तकारी का सामान बेचने वाले, शिकारा वाले ही नहीं दुकानदार तक उत्साहित हैं। हालांकि, उनके मन में अभी भी कई आशंकाएं हैं, लेकिन वह कह रहे हैं कि बीते दो माह के दौरान जिस तरह से जिस कश्मीर में आतंकी व अलगाववादी गतिविधियां ठप हैं अगर वह आगे भी बंद रहती हैं तो वे दो माह के नुकसान को नवंबर-दिसंबर में पूरा कर अगले साल की भी तैयारी कर लेंगे।

जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी अाइएएस शालिन काबरा ने 2 अगस्त को जारी एडवाइजरी को वापिस लेने की घोषणा करते हुए जम्मू-कश्मीर में देश भर से आने वाले पर्यटकों को घाटी में फिर से आमंत्रित करते हुए यह यकीन दिलाया कि राज्य में आने वाले पर्यटकों को सभी आवश्यक सहायता और मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।

जम्मू कश्मीर में रोजगार का बड़ा जरिया है पर्यटन: पर्यटन जगत में राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान करता है। यह पूरे राज्य में तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है। इनमें एक लाख लोग सिर्फ कश्मीर में ही हैं। घाटी में 1300 पंजीकृत हाऊसबोट, पांच हजार शिकारा,11 हजार पोनीवाला, 2100 स्लेजवाला, 1300 टूरिस्ट गाइड, तीन हजार पंजीकृत ट्रैवल एजेंट, 1500 होटल व गेस्टहाऊस हैं। जम्मू, कठुआ, कटड़ा, राजौरी,पुंछ, किश्तवाड़,करगिल व लेह में भी बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस, पोनीवाला, ट्रैवल एजेंट व टैक्सी ऑपरेटर हैं।

छह से सात लाख लोग जुड़े : आर्थिक मामलो के विशेषज्ञ कहे जाने वाले मसूद हुसैन मुताबिक, कश्मीर में कृषि के बाद सिर्फ टूरिज्म ही एक ऐसा सेक्टर है,जिसमें छह से सात लाख लोग प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रोजगार प्राप्त करते हैं। पूरे राज्य में आप 12 से 15 लाख लोगों को पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर कह सकते हैं। श्रीनगर, जम्मू, कटड़ा, गुलमर्ग, पहलगाम, लेह, कारगिल व हाईवे पर आम दुकानदार का कारोबार भी पर्यटकों की आमद पर ही टिका है। दस्तकारों की संख्या तीन से साढ़े तीन लाख है।

जुटाया जा रहा निजी निवेश: वादी में पर्यटन को फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र ने खुद मोर्चा संभाला है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की आमद को बढ़ाने के लिए देश-विदेश में बैक टू वैली कार्यक्रम चलाने का फैसला किया है। विभिन्न शहरों में अलग अलग टूरिस्ट फेयर व रोड शो कर, जम्मू कश्मीर की बहुरंगी संस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रचारित किया जाएगा। देश-विदेश के नामी टूर ऑपरेटरों को इसका हिस्सा बनाया जाएगा।

पर्यटन विभाग तैयार कर रहा रोडमैप : पर्यटन निदेशक कश्मीर निसार अहमन वानी ने कहा कि हम एक रोडमैप तैयार कर रहे हैं। इसमें निजी क्षेत्र से स्थानीय पर्यटन उद्योग में निवेश के लिए प्रयास कर रहे हैं। ट्रैवल एडवाइजरी हटा ली है। पर्यटन जगत की बेहतरी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। अक्टूबर के अंत में या दिवाली के दौरान यहां पर्यटन सीजन दोबारा शुरू होता है जो जनवरी तक चलता है। इसलिए एडवाइजरी सर्दियों के टूरिस्ट सीजन के साथ ही हटी है।

धार्मिक पर्यटन विकास पर दिया जाए जोर : राज्य के प्रतिष्ठत टूर एंड ट्रैवल एजेंट रमन शर्मा के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में हर प्रकार के पर्यटन के विकास की संभावना है। यहां अभी तक सिर्फ कश्मीर व जम्मू के कुछेक इलाकों को दुनिया में प्रचारित किया गया है। श्री माता वैष्णो देवी और अमरनाथ यात्रा को धार्मिक यात्राओं के तौर पर बढ़ाया है। कश्मीर में रोमांचकारी पर्यटन, वाइट राफङ्क्षटग, रॉक क्लाईंबिग, स्कईं, गोल्फ के अलावा हमें जम्मू से लेकर लद्दाख तक अलग अलग धर्माें के मानने वालों को ध्यान में रखते हुए धार्मिक स्थलों के आधार पर धार्मिक पर्यटन के सर्किट बनाने की जरूरत है। हमारे पूरे राज्य में फिल्मों की शूङ्क्षटग लायक कई लोकेशंस हैं,इनका लाभ उठाया जाए। यहां एक फिल्म सिटी बनाई जाए। पर्यटन विकास की जो योजना बने,उसमें स्थानीय हितधारकों को शामिल किया जाए।

गौरतलब है कि राज्य प्रशासन ने दो अगस्त को आतंकी हमले का खतरा जताते हुए कश्मीर आए देशी-विदेशी पर्यटकों और अमरनाथ श्रद्धालुओं को कश्मीर से जाने की सलाह दी थी। इसके बाद पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटने के बाद सरकार द्वारा वादी में लगाई पाबंदियों से पर्यटकों की आमद रुक गई थी। हालात में सुधार आने पर राज्य प्रशासन ने प्रशासनिक पाबंदियों को हटाने के साथ दो दिन पहले पर्यटकों के लिए जारी एडवाइजरी वापस लेने का फैसला किया है। वीरवार को अधिकारिक तौर पर एडवाइजरी वापस लेने की अधिसूचना जारी होने की पूरी उम्मीद है। 

Posted By: Rahul Sharma

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