Photos: नारियल पानी का गुड़ और ऑक्टोपस का अचार, श्रीनगर सरस मेले में छाया लक्षद्वीप; बंगाल के स्टॉल पर भारी भीड़
श्रीनगर के सरस मेले में लक्षद्वीप और बंगाल की महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद लोगों को खूब पसंद आ ...और पढ़ें

श्रीनगर सरस मेले में लक्षद्वीप का गुड़-बंगाल की कांथा कढ़ाई बनी आकर्षण का केंद्र।
HighLights
सरस मेले में लक्षद्वीप का नारियल पानी गुड़, तेल, अचार लोकप्रिय।
बंगाल की कांथा कढ़ाई ने कश्मीरियों को खूब भाया।
महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बंपर बिक्री।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। हजारों किलोमीटर दूर लक्षदीप से श्रीनगर के सरस मेले में पहुंची गुलनाज का अंदाज और उसके बनाए उत्पाद लोगों को बेहद पसंद आ रहे हैं। नारियल के पानी का बना गुड़ और तेल मेले में आए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। वहीं बंगाल से आई जोशना की फुलकारी और कांथा भी आकर्षण बनी है। मेले के पहले आठ दिनों में ही लाखों रुपयों का सामान बिक चुका है।
लक्षदीप से पहली बार कश्मीर में पहुंची गुलनाज अपने साथ नारियल के पानी का बना गुड़, तेल और नारियल के छिलकों से बनाए जेवर तथा मछली और आक्टोपस का आचार ले कर आई है। सरस मेले में पहली बार श्रीनगर में इस प्रकार के स्टाल को देख स्थानीय लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं।
आठ दिनों में ही गुड़ बिक चुका है और आचार भी समाप्त होने पर है। छिलकों से बने जेवर भी अतने आकर्षक हैं कि हर किसी को पसंद आ रहे हैं।

लक्षद्वीप की महिलाएं नारियल पानी से बना रहीं गुड़
गुलनाज का कहना है कि लक्षदीप की महिलाओं के समूह यह नारियल पानी का गुड और अन्य सामान तैयार करती हैं। यह गुड़ भी बिलकुल गन्ने के रस से बनने वाले गुड़ की तरह ही बनता है और इसका स्वाद भी अच्छा है।
वह बताती हैं कि नारियल का जो तेल महिलाओं के स्वयं सेवक तैयार करती हैं, वे एक दम से शुद्ध है। इसी तरह मछली और आक्टोपस का आचार भी स्वयं महिलाएं ही तैयार कर रही हैं।

छिलकों से जो गहने बनाए हैं, वे लक्षदीप में आने वाले पर्यटक पसंद करते हैं और यहां पर भी बिक रहे हैं।

उनका कहना है कि कश्मीर के बारे में बहुत सुन रखा था। यहां आकर अच्छा लग रहा है। ठंड ज्यादा है। इतनी ठंड में नहीं रहे हैं। श्रीनगर बहुत ही शांत और खूबसूरत है। यहां पर आकर लोगों का बहुत प्यार मिला है।

वहीं मेले में ही लगा बंगाल का स्टाल भी वहां के कपड़ों के कारण पसंद आ रहा है। जोशना और काकोली अपने समूह मस्ती के बैनर तले मेले में भाग लेने पहुंची हैं। कांथा कोई साधारण कपड़ा नहीं है। यह बंगाल और बांग्लादेश की एक प्राचीन और प्रसिद्ध कढ़ाई कला है। इसमें महिलाएं सारा काम हाथ से करती हैं।

आधा सामान बिक चुका
जोशना ने बताया कि वे कुल दस लाख रुपये का सामान लेकर आई थी। सारा सामान महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों ने तैयार किया है। जब वे मेले में आई थी तो इतनी उम्मीद नहीं थी लेकिन यहां पर लोगों को कांथा बहुत पसंद आ रहा है।
आधा सामान बिक चुका है। जोशना को भी श्रीनगर की ठंड अच्छी भी लग रही है और तंग भी कर रही है। उसका कहना है कि यहां पर आकर बहुत अच्छा लग रहा है।मेला जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन ने आयोजित किया है। इसमें देश के कई भागों से आए महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ले रहे हैं भाग।
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