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श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में लगी पाबंदियों से पारंपरिक शादियों के सीजन को धक्का लगा है। शादियों पर अधिक खर्च न करके सैकड़ों लोग साधारण तरीके से शादियां करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे मीट सप्लाई करने वालों, कैंपिंग एजेंसियों, सर्राफ दुकानों, कपड़े की दुकानों का बिजनेस प्रभावित हुआ है। शादियों के कई समारोह रद हो चुके हैं। समाचार पत्रों में शादियों के समारोहों के विज्ञापन प्रकाशित हो रहे हैं।

श्रीनगर के मोहम्मद शरीफ ने बताया कि उनकी बेटी की शादी के लिए समारोह निर्धारित किया गया था। मौजूदा हालात और पाबंदियां के बीच समारोह करना संभव नहीं था। इसलिए साधारण तरीके से शादी कर दी है। अब्दुल मजीद का कहना है कि मौजूदा हालात में बड़ा समारोह करके धूमधाम से शादी करना मुश्किल काम है। इसलिए मैंने अपनी बेटी की सादे तरीके से शादी की है। शादियों के लिए प्रबंध करने वाले कैटरर सलीम कुरैशी ने कहा कि हमें इस हालात में बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।

पहले यहां लोग सात-आठ सौ अतिथियों के लिए प्रबंध करते थे। अब मात्र यह संख्या एक सौ से दो सौ तक सिमट कर रह गई है। लोग कम अतिथियों के लिए कार्यक्रम करने के लिए कह रहे हैं। विवाह शादियों में टेंट उपलब्ध करवाने वाले मुश्ताक अहमद ने कहा कि पाबंदियों में हमारा काम बहुत कम हो गया है। शादियों के समारोहों में बहुत कम अतिथियों को बुलाकर साधारण तरीके से शादियां की जा रही हैं। बिजनेस को नुकसान पहुंचा है।

आभूषणों की खरीद भी घटी

आभूषण की दुकानों में बिक्री बहुत कम हो गई है। आभूषणों की बिक्री में पचास प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। रेडीमेड कपड़ों की दुकान के मलिक अब्दुल गफ्फार का कहना है कि पाबंदियों के बीच हमारी बिक्री बहुत कम है। कपड़ों की बिक्री में साठ प्रतिशत की कमी आई है। मीट के विक्रेता अब्दुल मलिक ने बताया कि पहले यहां पर रोजाना दस क्विंटल मीट बेचते थे अब यह बिक्री कम होकर दो क्विंटल से कम रह गई है। 

Posted By: Rahul Sharma

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